आद्या
तुम्हारा आना
इस घर में
चमत्कार-सा है।
सबको लगा
सब बड़े हो गए
पदोन्नति हो गई,
ऊपर चढ़ गए
एक पीढ़ी,
परिवार की
एक सीढ़ी।
आज हम सब
गर्वित हैं
इस विकास से
और आज
लग रहा है
मुझको
एक झटका-सा,
क्यों बाबा,
बधाई के साथ
पिटाई भी,
कर रही हो
आद्या, तुम!
बाबा बनने तक
कहां था एहसास
पिता होने का,
कब हुए बच्चे
कब हो गए बड़े
पता कहां चला,
और आज
बघारते शेखियां
बाबा होने पर
तुम्हारे आने से।
गुलाब कोठारी
