Gulabkothari's Blog

मार्च 23, 2009

बढते चलें

Filed under: Stambh — gulabkothari @ 7:00

जिस प्रकार हर समाज की इकाई एक परिवार होता है ठीक उसी प्रकार देश की भी इकाई एक गांव होता है। जैसे-जैसे गांव का विकास होता है उसी अनुपात में देश का विकास भी होता है। एक- एक व्यक्ति को उस विकास में अपनी भागीदारी निभानी होती है तभी हमकोे सामूहिक परिणाम देखने को मिलते हैं। हम पिछले साठ साल से देख रहे हैं कि हमारे यहां पंचायती राज है। सन् 1959 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नागौर में पंचायती राज की शुरूआत की। तब से आज तक इस पंचायती राज का फोटो हम हाथ में लेकर घूम रहे हैं। संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों के माध्यम से पंचायत राज और नगरपालिका संस्थाओं को अघिकार सम्पन्न बनाने की मंशा प्रकट की गई। पर खानापूर्ति ही ज्यादा हुई। न पंचायती राज के चुनाव के प्रति कोई सरकार हमको गम्भीर दिखाई देती है, न अघिकारों के प्रति कोई सचेत है। हम खुद भी सचेत नहीं हैं। बजट मिलने की बात तो बहुत ही दूर है, क्योकि ऊपर वाले कोई चाहते ही नहीं कि नीचे तक पंचायतों को बजट के अघिकार भी दिए जाएं।

पर समय बदल चुका है। और हमें भी इसके साथ-साथ बदलने की जरूरत है। अपने विकास के लिए हम दूसरों के भरोसे नहीं रह सकते। बीडा हमको खुद ही उठाना होगा। हमारे यहां एक कहावत है कि आप मरे बिना स्वर्ग नजर नहीं आता। लोकतंत्र की अवधारणा है जनता के लिए, जनता के द्वारा। जनता के लिए है, तो यह हमारा अघिकार हुआ लेकिन जनता के द्वारा है। हमें इसको जनता के द्वारा ही स्थापित करके मूर्त रूप देना पडेगा।

हम पिछले साठ साल से देख रहे हैं, बहुत सारे स्वार्थी तत्व बीच में पड गए और पंचायती राज के नाम से अपनी -अपनी स्वार्थ सिद्धी में लगे हुए हैं। हम वहीं के वहीं खडे हैं। हमारा विकास, हमारी शिक्षा, हमारी चिकित्सा, हमारा रोजगार, गांव की उन्नति सब वहीं के वहीं दिख रहे हैं। अन्य देश इसी दौरान कहां से कहां पहुंच गए। हमारे लिए ये सब आज भी सपना बने हुए हैं। समय आ गया है जब हमें नए संकल्प के साथ नए लोकतंत्र की स्थापना करने की जरूरत है। हमें संकल्प करना चाहिए कि हमारे गांव की हर गतिविघि पर हमारी नजर होगी। हमारे गांव की हर योजना पर हमारी नजर होगी। हमारे गांव के नाम पर हो रहे हर खर्च पर हमारी नजर होगी। हम सूचना के अघिकार का अघिक से अघिक उपयोग करके इसकी जानकारी अपने हाथ में रखेंगे। तब ही हम सुनिश्चित कर सकेंगे कि हमें लोकतंत्र का जो लाभ मिलना चाहिए, वह मिल रहा है। तभी शायद हम नए सिरे से अपनी पीढी को संस्कारवान बना पाएंगे। नई पीढी को आवश्यकता के अनुरूप शिक्षित भी कर पाएंगे। हम अपने-अपने गांव को एक आदर्श गांव की तरह से विकसित कर सकेंगे।

हर बार पांच साल में हमारे सामने चुनाव आते हैं। हर चुनाव में हमसे कुछ वादे किए जाते हैं। चुनाव समाप्त होने के बाद वे सब वादे भुला दिए जाते हैं। हम अपनी-अपनी आवश्यकताओं के लिए जूझते रहते हैं, एडियां घिसते रहते हैं। हमारी आवाज किसी कान तक नहीं पहुंचती। दूसरी ओर हम यह देख रहे हैं कि विकास के स्थान पर हमारा कितना बडा नुकसान इस लोकतंत्र के नाम पर होता चला जा रहा है। चुनाव में वोटों की राजनीति ने हमारे समाज के कितने टुकडे कर दिए। आरक्षण ने टुकडे कर दिए, जातिवाद ने टुकडे कर दिए, वंशवाद ने टुकडे कर दिए। इसका नुकसान यहां तक हो रहा है कि कई अपराधी भी चुनाव जीत कर आने लग गए। फिर हम अपने गांव में विकास की उस छवि को, उस सपने को मूर्त रूप होते हुए देखने की उम्मीद कैसे करेंक्

आज सचमुच हमें इस बात के लिए संकल्पित होना है कि हम जातिवाद, धर्म या और किसी भी बहाने से समाज को टूटने नहीं देंगे। उन प्रत्याशियों पर भी कडी नजर रखेंगे जो इन चीजों को बढावा देकर या इनके बहाने से हमें बहला-फुसला कर हमारा मत ले जाते हैं। अगर यह टूट हम रोक पाए तो निश्चित है कि हम स्वस्थ समाज को खडा कर सकेंगे। नई पीढी को भी हमें आश्वस्त करने की जरूरत है कि उसका भविष्य लोकतंत्र में ही सुरक्षित है। और किसी तंत्र में सुरक्षित नहीं। नई पीढी को कमर कस कर नई उडान के लिए अपने आपको तैयार करना चाहिए। जुट जाना चाहिए। पत्रिका कदम-कदम पर उनके साथ रहेगी। पत्रिका जनता को जागरूक करने के लिए, लोकतंत्र में उनकी भूमिका को बढाने के लिए लगातार अभियान चलाती रहती है। विधानसभा चुनाव के दौरान जागो जनमत अभियान इसी उद्देश्य के लिए था। हमने मतदान बढाने के लिए या मताघिकार का उपयोग करने के लिए अभियान चलाए। हमने प्रत्याशियों से लोगों को रूबरू कराने के लिए अभियान चलाए। ठीक उसी तरह अब नया अभियान हमें चलाना है। लोकतंत्र में अपनी भागीदारी और अपनी संकल्पबद्धता बढाने और अपने सपनों के गांव को, विकसित करने के मार्ग पर हम श्रद्धेय बाबूसा. के जन्म दिवस 20 मार्च को अपना पहला कदम उठा चुके हैं। राजस्थान के 157 गांवों में ग्रामसभाएं हुई। मध्यप्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में भी हुईं। आप सबने पूरे उत्साह से भाग लिया। महिलाओं ने भी पूरी भागीदारी की। हजारों लोगों ने अपने-अपने गांव को साक्षर करने, बुराइयों को दूर करने और विकास की दिशा में आगे बढने का संकल्प किया। पत्रिका परिवार की ओर से आपकी भागीदारी के लिए हार्दिक आभार। यह तो शुरूआत है। इस अभियान को आगे बढाने में पत्रिका कोई कसर नहीं छोडेगी। ईश्वर से कामना करता हूं कि इस उठे हुए कदम को आगे पूरे जोश के साथ बढाने में हमारे सहायक बनें। हमें आशीर्वाद दें, यही मंगल कामना है।

गुलाब कोठारी

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