Gulabkothari's Blog

मई 8, 2009

मत चूके चौहान

चुनाव का चिडियाघर आज बन्द हो जाएगा। सब अपनी-अपनी बोलियां बोलकर चले गए। झेलना तो हमको है। हमारी भाषा में किसी ने कोई भी बात नहीं कही। एक-दूसरे को ही सुना गए। उनको सत्ता चाहिए, फिर हमारी कोई जरू रत नहीं, अगले पांच वर्ष तक। हम तक दस पैसे पहुंचे या पांच ये भी जबानी जमा खर्च की बातें हैं। उनकी तो लडाई बडे हिस्से पर हाथ मारने की है। लोकतंत्र की धज्जियां उडाने में किसी ने कसर नहीं छोडी। मुद्दों पर किसी ने बात ही नहीं की। गरीबी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे तो किसी को याद भी नहीं आए। विकास की बात तो बहुत दूर की है। आतंकवाद को तो जैसे भूल ही गए। हां, प्रचार अभियान में अचानक सभी पार्टियों को एक-दूसरे की झोली में काला धन भरा हुआ जरू र दिखाई देने लगा।
राजस्थान का चुनाव प्रचार मूल रू प में अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे पर ही निर्भर रहा। दोनों ने ही अपनी पार्टियों का प्रतिनिधित्व किया। इसमें भी कांग्रेस ने वसुंधरा को झालावाड में अटका कर अपना रास्ता काफी साफ कर दिया। इसी प्रकार भाजपा ने जसवंत सिंह और उनके पुत्र को साथ-साथ टिकट देकर अपनी लाचारी भी प्रकट की। गहलोत का प्रचार अभियान 125-150 बैठकों तक पहुंच गया। लाभ तो मिलेगा ही।
इस बार जातिगत समीकरण भी कुछ तो ठण्डे पडे हैं। विधानसभा चुनावों जितनी चर्चा इस बार केवल मीणा वर्ग में ही रही। किरोडी लाल ने मीणाओं का साथ देकर कांग्रेस के नमोनारायण को जिताने का आह्वान भी किया, वहीं भाजपा के श्याम शर्मा का प्रचार करने कोटा पहुंच गए। इधर गैर मीणा समुदाय ने मीणा जाति के प्रत्याशी को वोट न देने का मंतव्य जता करके सारा समीकरण बिगाड दिया। इससे दौसा के दोनों ही मुख्य पार्टियों के प्रत्याशी सकते में आ गए। जो भी हो जातीय आधार तो समाप्त होना चाहिए। और वंशवाद भी। हालांकि राहुल गांधी ने कहा है कि परिवारवाद अलोकतांत्रिक है, फिर भी इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने देश में जितने सामंतों को सत्ता सौंपी है, वह तो इसके विपरीत ही है। बडे लोगों को करना चाहिए, कहने का काम तो छोटे लोग करते रहेंगे। आज दोनों ही दल देश को नेतृत्व देने की स्थिति में नहीं हैं। इसके बारे में पूरे प्रचार के दौरान किसी ने कुछ चिन्ता नहीं जताई। सरकारें भी तभी काम करती हैं, जब देश किसी नेता की आवाज के पीछे चलता है। इस चुनाव में भी कोई नेता उभरकर नहीं आया।
आज मतदान करना है। लोकतंत्र के उत्सव का दिन है। आज का संकल्प है कि हमें “मतदान” करके ही अन्य कार्य करने हैं। कोई भी छूट न जाए। राजस्थान वैसे ही देश में सदा से पीछे रहा है। औसत मतदान में। उसमें भी महिलाएं और भी पीछे हैं। पिछले चुनाव में भी महिलाएं पुरूष मतदाताओं से 11 प्रतिशत पीछे थीं। इस बार तो कुछ आगे निकलने की बात हो। युवा पीढी भी जुड गई है अब तो। और हां! मतदान भी करना है और विवेक पूर्वक भी करना है। प्रत्याशी जनता के बीच का हो, जमीन से जुडा हो, शिक्षित और अनुभवी हो। अपराधी प्रवृत्ति का तो बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। न ही किसी जाति के वोट मांगने वाला ही हो। उसे तो अन्य लोग सीधा नकार सकते हैं। आपका वोट इस देश का भविष्य बनाता है। फिर किसी पर दोष डालकर भी क्या मिल जाएगा। आपका प्रत्याशी किसके साथ मिलकर काम करेगा, यह भी समझना है। ईश्वर हम सबको सद्बुद्धि दे, चुनाव शान्तिपूर्वक सम्पन्न हों और देश विकास के पथ पर आगे बढ सके, यही प्रार्थना है।
गुलाब कोठारी

8 टिप्पणियाँ »

  1. sir,i have been your follower since a long time,you have been my inspiration for writing,i want to know how can i publish my story in your paper,plz give your precious time to response thanks sir

    टिप्पणी द्वारा Amit kumar — नवम्बर 14, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  2. कोठारी जी चुनाव की जो समीक्षा आपने की हैं उसके लिए धन्यवाद आप जो कह रहे रहे हैं पक्षपात रहित हैं, अन्यथा आजकल मीडिया वाले पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर लिखते हैं जो हमारे लिए दुर्भागापूर्ण हैं

    टिप्पणी द्वारा AMIT — मई 13, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  3. आदरणीय कोठारीजी
    आज आपका आलेख वेब पर पढा। मतदान का प्रतिशत आशा से बहुत कम रहा है। राजनेता इसके लिए कम जिम्मेवार नहीं है। वे तो कतई चाहते ही नहीं है कि जनता शििक्षत हो आैर इतनी समझ रख सके कि मतदान करना है अथवा नहीं आैर करना है तो किसको। यदि राजनेताआें ने ये किया होता तो आजादी के इतने वषौ के शिक्षा स्तर भारत में बहुत अच्छा होता

    टिप्पणी द्वारा Vinod Kumar Purohit — मई 11, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  4. इस बार के चुनाव कई मायनों में अलग रहे..!अब आयोग को चाहिए की-[१]सभी चुनाव एक साथ कराये,[२]कार्यक्रम.. संक्ष्पित हो,[३]मौसम का भी ध्यान रखा जाये..!इतना खर्चा करने के बाद भी यदि मतदान ४० प्रतिशत हो तो क्या समझा जाए..

    टिप्पणी द्वारा RAJNISH PARIHAR — मई 8, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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