Gulabkothari's Blog

मई 18, 2009

आशा की किरण

लोकसभा चुनाव के परिणामों ने मतदाता की परिपक्वता पर मुहर लगा दी है। अब कोई भी राजनीतिक दल मतदाता के साथ खिलवाड नहीं कर सकेगा। यह मान लेने का समय भी अब नहीं रहा कि मतदाता उदासीन दिखाई देते हुए भी चौकस नहीं हैं। चुनाव परिणाम यूं तो अनेक पहलुओं की स्थिति बखान कर रहे हैं, फिर भी दो-तीन बातें मुख्य तौर पर उभरी हैं। मतदाता ने किसी एक दल को, कांग्रेस को, ही बहुमत देने की ओर कदम उठाया है। ताकि कांग्रेस को अपना घोषणा पत्र निर्विघ्न रू प से लागू करने का अवसर मिल सके।
पिछले पांच वर्षों का इतिहास इसका साक्षी है कि कांग्रेस का प्रधानमंत्री भी अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर कांग्रेस की नीति के अनुरू प निर्णय नहीं कर सका। हर बार कोई न कोई सहयोगी ही कांटे बिछा देता था। मतदाता ने इस बार उन कांटों को भी बुहार दिया। जो आपराधिक तत्व सत्ता पर काबिज हो गए थे और सत्ता को अपनी मुट्ठी में लेकर चल रहे थे, उनको बडा सबक सिखा दिया।
देश के मानचित्र पर आपराधिक तत्वों का विकास और जमावडा सर्वाधिक उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में होने लगा है। इसके लिए जिम्मेदार वहां के क्षेत्रीय दल ही रहे हैं। मतदाता ने उन दलों को इस बार पटखनी दे दी और विकास की डोर विश्वसनीय पार्टी के हाथों सौंप दी। समाजवादी पार्टी, लोकजन शक्ति पार्टी, राजद एवं वाम दलों पर कडा प्रहार करके लोकतंत्र की लाज बचा ली। इसके लिए मतदाता को नमन! अपराधियों के बीच बैठकर इतना साहस दिखाना कम बात नहीं है। मतदाता ने भाजपा को भी बडा झटका दिया है। कर्मठ और विवेकशील माने जाने वाले दल ने पिछले दस वर्ष में अपनी छवि खराब ही की है। आज भाजपा के अधिकांश नेता अपने अहंकार के कारण यथार्थ को स्वीकार ही नहीं करते। वाणी का संयम भी खो बैठे। आचरण में भी भारी गिरावट आई है। इन सब पर भी धन का दाग गहरा लगा हुआ है (अनेक पर)। अटलजी का काल भी देखा, यूपीए की जीत के बाद भाजपा की बौखलाहट देखी और इस बार उन्हें अनियंत्रित होते हुए भी देखा। देश एक पार्टी का शासन तो चाहता है, किन्तु ऎसा सत्ता का मद भी नहीं चाहता, जैसा कि आज भाजपा में आ गया है। भाजपा को अपने आचरण पर चिंतन करना चाहिए।
तीसरा और चौथा मोर्चा किन दलों ने बनाया है, यह भी मतदाता के जेहन में रहा है और उन क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय स्तर पर निष्क्रिय करने का भी प्रयास किया है। उनको अपनी सीमा बताने का कार्य भी काफी हद तक इन चुनावों में हुआ है। बचा-खुचा अगले चुनाव में नई पीढी कर दिखाएगी। इस दृष्टि से ऎसे क्षेत्रीय दलों को मर्यादित एवं लोकहित का व्यवहार भी सीख लेना चाहिए।
कुल मिलाकर एक परिपक्व परिणाम सामने आया है। पिछले कार्य और भावी दृष्टि का प्रभाव भी इनमें झलकता है। उम्मीद करनी चाहिए कि नई सरकार देशहित के और जनजीवन के मुद्दों को प्राथमिकता देती रहेगी।
गुलाब कोठारी

टिप्पणी करे »

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं ।

RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

वर्डप्रेस (WordPress.com) पर एक स्वतंत्र वेबसाइट या ब्लॉग बनाएँ .

%d bloggers like this: