Gulabkothari's Blog

मई 22, 2009

संयोग

Filed under: Manas-1 — gulabkothari @ 7:00
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जिस दिन व्यक्ति पैदा होता है, उसी दिन उसकी जीवन-कुण्डली बन जाती है। उसे जीवन-यात्रा के किस दौर से गुजरना है, कब क्या होना है, आदि सब तय हो जाता है। फिर भी, पूरी उम्र तक व्यक्ति अपनी इच्छा से जीने का प्रयास करता रहता है। योजनाएं बनाता है, कर्म करता है और प्रयास करता है कि विधाता का लिखा कुछ टाल सके।
होता क्या है, इस पर विचार करके देखें तो जीवनक्रम को चलाने का, जीवन में दिशा मोडने का कार्य “संयोग” से होता है। बहुत से व्यक्ति संयोग से मिल जाते हैं, उनका प्रभाव हमारे जीवन में उतरता है, किन्तु हमें उसका अर्थ समझ में नहीं आ पाता। अनेक बार हमें कई टेलीफोन सुनने पडते हैं जो हमारे कतिपय इच्छित कार्यो को पूरा करने में मदद करते हैं, या हमारे कार्यो से सम्बन्धित होते हैं। यह सब हमारी मर्जी से नहीं होता। हम चाहते हुए अथवा अनचाहे ही इन संयोगों के माध्यम से अपना जीवनक्रम बदल बैठते हैं।
कौन बनाता है संयोगक् कैसे शादी के लिए जाता हुआ दूल्हा दुर्घटनाग्रस्त हो जाता हैक् कैसे घर में चोरी हो जाती है और अनेक इच्छाएं दबकर रह जाती हैंक् कैसे व्यक्ति अचानक बीमार पड जाता हैक् कैसे पचास वर्ष तक कुंआरा रहकर भी किसी व्यक्ति का अचानक शादी का मानस बन जाता हैक् कैसे अचानक बडे पुरस्कार व्यक्ति का जीवन-धरातल रातों-रात बदल देते हैंक् सबका एक ही उत्तर है—संयोग।
संयोग को इस सृष्टि-क्रम का भाग ही कहा जा सकता है। व्यक्ति की इच्छाओं या विचारों से इनका कोई लेन-देन नहीं होता। जो होना होता है, वही होता है। यह सब देखकर आपकी बुद्धि जवाब दे जाएगी। जीवन से जुडे सुख-दु:ख के पीछे संयोग भी एक बडा कारण है। यह जीवन का अभिन्न अंग भी है। व्यक्ति सृष्टि का अंग है। उसके पिछले जन्म के कर्म भी इन संयोगों के पीछे कारक का काम करते हैं। पिछला जन्म ही तो इस जन्म का कारण है& यही भारतीय दर्शन है। आज के वैज्ञानिक भी इस तथ्य को मानते हैं कि व्यक्ति के जन्म के साथ ही पिछले जन्म के संस्कार उसके जीवन को प्रभावित करने लग जाते हैं। उसके अवचेतन मन में इन संस्कारों की छाप होती है, भले ही उसके बाहरी स्वरूप में वे दृष्टिगोचर नही हो पाएं। अवसर आने पर उनका प्रभाव दिखाई देने लगता है।
आप किस प्रभाव से अपने परिवार में जन्म लेते हैं और कौन आपके चारों ओर जीते हैं, यह सब नियत सृष्टिक्रम में होता है। कौन आपको किस रूप में प्रभावित करेगा, सुखी करेगा या नही, यह भी तय होता है। इसके अलावा आपके बचपन के संस्कार भी जीवनपर्यन्त आपके साथ चलते हैं। सभी संयोग इन संस्कारों को प्रभावित करते हैं, आपके कार्यो को प्रभावित करते हैं।
आप डायरी लिखना शुरू करें। प्रात: उठने से लेकर रात सोने तक कौन-कौन से संयोग आपके सामने आए, कौन-कौन आपसे मिला, किस प्रकार के फोन आए, किसने किए, किस काम से किए, क्या घटनाएं हुई, इत्यादि। आपके प्रतिदिन के कार्यकलापों से क्या हुआ और संयोग ने भावी जीवन में क्या कर दिखाया, आपको शीघ्र ही अनुमान हो जाएगा। इस प्रकार हमारे कर्म की भूमिका भी हमारी समझ में आ जाएगी।

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5 टिप्पणियाँ »

  1. aap bahut gharai ki baat karte hai.Isiliye mere prasan ka kripya jabab de to achaha hoga.-aap(manusya )kyon jita hai aur kya hai hota hai ye jiban.aasa hai aap jarur jabab denge.

    टिप्पणी द्वारा sunil kumar shaw — जुलाई 21, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • मनुष्य जीवन कर्मफल भोगने के लिए होता है। समझदार व्यक्ति मोक्ष तक पहुंच जाता है।

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — सितम्बर 30, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  2. ap ki likhne ki haili bahut pasand hai muje apki likhavat se bahut prabhavit hu mai likhte rahie

    टिप्पणी द्वारा Fatah lal rebari — जुलाई 17, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  3. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . लिखते रहिये
    चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है

    गार्गी

    टिप्पणी द्वारा gargi — मई 22, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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