Gulabkothari's Blog

मई 25, 2009

धन्य-धन्य भागीदारी

Filed under: Uncategorized — gulabkothari @ 7:00
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आपको याद होगा कि ठीक एक साल पहले हम कुछ सपने लेकर मध्यप्रदेश आए थे। एक वर्ष में वो सपने सच हुए। मध्यप्रदेश के लिए हम अपने हुए। और यह सारा हुआ ज्ञान और कर्म के सहारे। लोगों में आस्था का भाव पैदा कर पाए। हमारे अनुरोध पर लोग तपती दोपहर में “अमृतम् जलम्” के लिए श्रमदान करते रहे और आज तक कर रहे हैं। हमारे भी कोई पिछले पुण्य ही होंगे, जिनके कारण इतना आशीर्वाद मिला। यहां तक कि माननीय मुख्यमंत्री ने भी “अमृतम् जलम्” के जरिए अपना जन्मदिन मनाया।
यह जो पत्रिका आपके हाथ में है, वह तो पत्रिका का शरीर है। जो पढकर समझ रहे हैं, वह बुद्धि क्षेत्र का ज्ञान है। जिसे आप जीवन के साथ जुडा हुआ अनुभव करते हैं, वह पत्रिका की आत्मा है। केवल इसी का सम्बन्ध आपकी आत्मा से बना हुआ है। शरीर को पशु कहते हैं। इसका दुबला या मोटा होना अर्थहीन है। इसको आत्मा ही चलाता है। इसीलिए हमने पत्रिका को आत्मा का अखबार बनाना ही उचित समझा ताकि ज्ञान को प्रकाशित होने का अवसर मिल सके।

पिछले एक वर्ष के छोटे-से काल में जो वातावरण पत्रिका ने बनाया, आप सब उसके साक्षी हैं। पत्रिका ने हर पाठक के दिल को छुआ है। उसकी जिन्दगी के पास खडा रहने का प्रयास किया है। तभी लोगों ने हमारी बात में आस्था जताते हुए कडी धूप में श्रमदान करने का संकल्प किया और इतना बडा कार्य कर दिखाया। आत्मा के बुलावे पर आत्मा दौडी। धूप में पसीना बहाकर भी आनन्द की अनुभूति प्राप्त की।

इसी एक साल में हमने लोकतंत्र के दो महाकुंभ भी देखे। विधानसभा और लोकसभा के आम चुनाव। पत्रिका अपने आप पर चौथा पाया होने का गर्व करता है। बाजारू माल की तरह पत्रिका को कोई खरीद नहीं पाया। न ही पत्रिका ने किसी को भ्रमित किया। “जागो जनमत” और “प्रतिबद्धता पत्र” जैसे अभियान यहां के पाठकों को पहली बार देखने को मिले। हमारे आकलन आगे-से-आगे खरे उतरे और हर दृष्टि से निष्पक्ष भी रहे। दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलों ने भी मुक्त कण्ठ से रिपोर्टिग और आकलन की प्रशंसा की।
पूरे वर्षभर पत्रिका सचाई उजागर करने के लिए चर्चा में रहा। सामाजिक मुद्दों पर तो सरकार ने भी तुरंत कार्रवाई कर दिखाई। व्यापार के साथ-साथ सामाजिक नेतृत्व का भी बोध बरकरार रहा। इसी का परिणाम रहा कि भोपाल में फिर से गंगा-जमुनी संस्कृति की लहरें उठने लगीं।

पंजाबी, सिंधी, मुसलमान आदि अल्पसंख्यकों ने तो पत्रिका के सम्मान में समारोह आयोजित किए। लोगों के इस जुडाव को देखकर ही शायद मुख्यमंत्री ने भोपाल की सभा में कहा था-“अकेली सरकार विकास नहीं कर सकती। समाज साथ होना जरूरी है। जल संरक्षण अभियान मे पत्रिका साथ है तो कुछ भी मुश्किल नहीं।”
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने तो एक से अधिक बार फोन करके पत्रिका को खरी-खरी समीक्षा के लिए बधाइयां दीं। उनको विश्वास ही नहीं था कि कोई अखबार इतना निष्पक्ष भी हो सकता है, कि पूरी तस्वीर आइने की तरह दिखा दे।

पत्रिका चूंकि पाठक को ही सब कुछ मानता है, अत: इसकी सामग्री की गुणवत्ता, मौलिकता और इसका सांस्कृतिक धरातल अपना एक मूल स्वरूप लिए रहता है। पत्रिका मूल लेखन और मूल्यपरक सामग्री को ही प्राथमिकता देता है। नकल नहीं करता। इसीलिए पाठकों के जीवन का अनिवार्य अंग बन जाता है। पत्रिका एवं अन्य अखबारों के पाठकों में यह वैचारिक अन्तर देखा जा सकता है। पत्रिका ने शिक्षा में छूट रही मानवीय संवेदनाओं को लोक शिक्षण के रूप में एक मशाल बनकर प्रयोग किया है।

अभी पत्रिका का यह पहला साल ही है और मध्यप्रदेश का बडा हिस्सा सामने भी है। हम आपको विश्वास दिला सकते हैं कि पत्रिका की पत्रकारिता का लोगों को अनुसरण करना होगा। नई पीढी तो बहुत जागरूक है। घटिया सामग्री पढकर स्वयं को अपमानित नहीं करेगी। पत्रिका की तरह हर अखबार को पहले पाठक के दिल से जुडना पडेगा, फिर धन से। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश में भी एक नए युग की शुरूआत ही हुई है। इसका सभी ने ह्वदय से स्वागत भी किया है। पत्रिका के एजेण्ट और वितरकों का उत्साह इसका प्रमाण है। विज्ञापनदाता भी मानने लगा है कि अच्छे अखबार की साख ही माल को चोटी पर पहुंचा सकती है।

व्यापारिक क्षेत्र के लोगों को एक बात पर अवश्य चिन्तन करना चाहिए कि किस कारण से भोपाल और इन्दौर क्षेत्र के लाखों पाठकों ने दशकों से आ रहे अपने अखबारों को पढना बन्द कर दिया। और वह भी तब, जब कि पत्रिका के केवल दो संस्करण-भोपाल और इन्दौर ही शुरू हुए हैं। इसी में भविष्य की तस्वीर है।
विज्ञापन को पढ लेना ही काफी नहीं है, उसका प्रभाव मानस परिवर्तन में भी दिखना चाहिए। साख अच्छी हो तो अखबार भी बिकता है और विज्ञापनदाता का माल भी। वितरकों को तो राजस्थान का दौरा कर लेना चाहिए। सारा कुछ समझ में आ जाएगा।

पत्रिका ने एक साल में जो कुछ कर दिखाया है उसकी तो स्पर्द्धी अखबार भी नकल करते हैं। चाहे पुस्तक मेला हो, अमृतम् जलम् हो या फिर पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था। इसका एक ही अर्थ है-व्यापार में भले ही वे स्पर्द्धी हैं, किन्तु हमारे अच्छे कार्यो की सराहना वे भी करते हैं, और हमारा साथ देते हैं। हम तो उनके भी आभारी हैं।
पत्रिका अपनी कार्यशैली से भी सोते हुओं में जाग्रत रहने वाला है, यह उसने एक साल में यहां आकर भी सिद्ध कर दिया है। पत्रिका भोपाल की आवाज बन चुका है और इन्दौर की भी। बाकी क्षेत्र भी दूर नहीं हैं। आप लोगों का आशीर्वाद चाहिए। आप हमारे हाथ मजबूत रखें, हम आपके। भोपाल के ही बशीर बद्र साहिब का एक शेर है-

“तुम्हारे शहर के सारे दिये तो सो गए लेकिन,
हवा से पूछना दहलीज पर ये कौन जलता है।”
यही पत्रिका है।
आइए! ज्ञान की इस रोशनी में मिलकर एक नया प्रदेश बनाएं। बच्चों के भविष्य का मार्ग प्रशस्त करें। आप और हम कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढते जाएं। ईश्वर भी खुद साथ हो जाएगा।
नमस्कार!

गुलाब कोठारी

6 टिप्पणियाँ »

  1. you,the present time’s leading man are working good. you have idieas on every issue but forgatting one important one is “ICEASING POPULATION”. AND I PERSONALY THINK THAT IT IS MAIN REASON FOR EVERYTHING LIKElosing forests,lack of water, defeciany of elctricity. like your paper nio one is giving attention on the issue. think that an unemployar would like search a job instead of reading your comments.”HRIT RAJASTHAN”IS GOOD EFFORT. please give some tim e for issued issue

    टिप्पणी द्वारा ravi malav — जुलाई 9, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  2. shraddheya kothariji,
    jai jinendra
    amritam jalam ke madhyam se aapne ya yon kahoon ki rajasthan patrika ne jo mahatee karya kiya hai iska aaj toh jo moolyankan hoga voh hoga, aane wale samay me is mahayagya ki yasho-gatha ko bade samman ke saath smrit kiya jayega…………manavta aur prakriti k beech paraspar ssamanjasya sthapit karke hi lok kalyan ke sankalp ko saphal kiya ja sakta hai…is tathya ko aapne sahi samay par poorna sajagta aur samvedansheelta ke sath na keval sweekar kiya hai apitu samaj ke samaksh satyapit aur adhishthapit bhi kiya hai…….main aur mera tan-man aapki aseem medha aur lok kalyan ki bhavna ke liye sada sada prashnsak hain aur rahenge
    WISH YOU ALL THE VERY BEST
    -albela khatri
    http://www.albelakhatri.com

    टिप्पणी द्वारा albela khatri — मई 25, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • समाचार पत्र व्यक्ति का होते हुए भी समाज के लिए ही होता है। व्यक्ति गौण रहता है। एक जीवन में इतने लोगों के मन में विश्वास और श्रद्धा पैदा कर सकें, फिर और क्या चाहिए

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — मई 29, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  3. बधाई इस नेक काम के लिये..

    टिप्पणी द्वारा Ranjan — मई 25, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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