Gulabkothari's Blog

जून 12, 2009

आ-रक्षण

Filed under: Stambh — gulabkothari @ 7:00
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अरक्षण का अर्थ है चारों ओर से सुरक्षित होना। महिला आरक्षण बिल को लेकर एक वाक् युद्ध सा देश में छिड़ा हुआ है। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि आरक्षित वर्ग की सुरक्षा भी हो और देश भी असुरक्षित महसूस नहीं करे। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने पर दोनों बड़े दल तो सहमत हैं, किन्तु कुछ प्रान्तीय दल आलोचना कर रहे हैं। वैसे आरक्षण का मूल प्रस्ताव जब स्वीकृत हुआ, तब कोई आगे नहीं आया। आज मुलायम-लालू यदि कहते हैं कि सीटों का नहीं पार्टी प्रत्याशियों की संख्या का आरक्षण होना चाहिए। बात उचित तो है, किन्तु अन्य पदों के आरक्षण या अन्य सीटों के आरक्षण में यह नीति क्यों नहीं अपनानी चाहिए, इस पर वे मौन हैं।

वास्तविकता यह है कि अन्य नीयत से लागू किया कानून आज देश के विखण्ड़न का हेतु बन गया। क्योंकि इसके कार्यगत स्वरूप को नियंत्रण में नहीं रखा गया। इससे आरक्षण की मूल भावना ही खो गई। लाभ कुछ प्रभावशाली लोगों तक सिमट कर रह गया। अधिकांश वंचित रह गए। एक ही परिवार के एक ही सदस्य को आरक्षण देने की शर्त होती, तब इसका व्यावहारिक स्वरूप दूसरा होता। गुणवत्ता का मापदण्ड़ तो रहा ही नहीं।

आरक्षण की पूरी नीति पर पुनर्विचार होना चाहिए, ताकि इसका लाभ व्यापक समाज तक पहुंच सके और गुणवत्ता भी बनी रहे। इसके लिए जिस प्रकार सीटों या क्षेत्रों को आरक्षित किया गया है, यह तो सामन्ती दृष्टिकोण ही है। लोकतंत्र या जनता की आवाज कहां सुनाई देगी। आज इन सीटों पर जनता मतदान करते हुए भी कुण्ठित है। यह विड़म्बना ही है कि चुनाव आयोग की संहिता में जहां “जाति” शब्द का निषेध है, वहीं आयोग “जाति” आधारित आरक्षण के आधार पर सीटें आरक्षित करता है। आरक्षण का अर्थ होना चाहिए कि प्रत्येक पार्टी अपने प्रत्याशियों की सूची में आरक्षित वर्ग का हिस्सा निश्चित करे और जनता उनमें से अपनी पसन्द का उम्मीदवार चुने। सीटों का आरक्षण तो लोकतंत्र पर कुठाराघात ही है। यही लक्ष्य महिला आरक्षण में भी होना चाहिए। हर पार्टी की सूची में 33 प्रतिशत महिलाएं भी हों, सामान्य और आरक्षित वर्ग की भी हों। शेष जनता पर छोड़ा जाना चाहिए, ताकि हर उम्मीदवार गुणवत्ता के आधार पर ही मैदान में उतरे।

सच तो यह है कि हमारे राजनेता स्वयं संकल्पवान नहीं हैं, अवसरवादी हैं। भीतर से खोखले हैं, अत: जनता का सामना नहीं कर पाते। देश के हित में आवाज उठाने वाले भी नहीं हैं। साठ साल की यात्रा स्वयं इसका उदाहरण है। चुनाव जीतने के बाद सभी दलों के नेता एक-दूसरे की भाषा बोलने लग जाते हैं। तब सुधार कहां से निकलेगा आरक्षण का जहर भी यह देश इसीलिए पी रहा है। प्रतीक्षा है कि कब कोई नेता ऎसा आए, जनता को साथ ले और देशहित में बड़े मुद्दों को हल कर दे।

गुलाब कोठारी

6 टिप्पणियाँ »

  1. aaj mahila kisi per ashrit nahi hai.Yahi gati rahi to in avsarwadi natao ko dar hai ke aisa na ho ke aaj yeh mahila hamsay mang rahi hai kal hamay na hath failana per jai Yahi sach hai kyoke vo khud he daiykh rahay hai Mahila warg ke unnye ko. Her jagah Mahila in 1st nahi khud Mahila apna 1st Sathan(position)bana rahi hai.Or ab dekho Dal or Kankar Wale Dall pakte hai ya latkte hai

    टिप्पणी द्वारा anndy — मार्च 18, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  2. i am a buding artist just seeks a true person’s blessings like you for my further future

    टिप्पणी द्वारा jyotie bhardwaj — जून 14, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • God is there to bless us all

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — जून 16, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

      • GOD CANT BE EVRYWHERE AND SO HE MADE HIS REFLECTIONS and hope is the only cloud that brings rain thanks my art could nt approach the public uptill….. and i thinks it difficult present urself… as u got to convey ur message to all of us i too wish to convey my word in colors and forms ….. and ur blessings will help me…

        टिप्पणी द्वारा jyotie btohardwaj — जून 20, 2009 @ 7:00

      • Sit in silence and ask this question to your self…again and again.

        टिप्पणी द्वारा gulabkothari — जून 26, 2009 @ 7:00


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