Gulabkothari's Blog

जुलाई 4, 2009

कसो कमर

आज से मध्य प्रदेश के विधायकों का प्रशिक्षण शुरू हो रहा है। राजस्थान के विधायकों का ऎसा ही प्रशिक्षण शिविर विधानसभा के बजट सत्र के बाद होगा। उन्हें अपने काम-काज में दीक्षित किया जाएगा। दोनों ही जगह नई सरकार के 6 महीने तो चुनावों में ही गुजर गए। नई सरकार के विजय के जश्न भी हो चुके। मध्य प्रदेश में तो पहले भी सरकार भाजपा की ही थी, लेकिन राजस्थान में पिछली सरकार के कर्मो का फल इनके हिस्से में आया है। इसका अर्थ है कि हमें इतिहास से सीख लेनी चाहिए। ठोसकाम करने के लिए कमर कस लेनी चाहिए। एक संकल्प यह भी होना चाहिए कि प्रतिनिधि आप किसी भी दल के हों, कार्य प्रदेश के लिए करना है। ये संकल्प मध्य प्रदेश, राजस्थान ही नहीं हर राज्य के विधायकों को लेने चाहिएं।
पिछले दशकों का इतिहास गवाह है कि सबसे अधिक गिरावट जन प्रतिनिधियों के व्यक्तिगत आचरण और उसकेकारण सदन की गरिमा बनाए रखने में आई। अच्छा हो इस बात को प्रशिक्षण का पहला अध्याय बनाया जाए। व्यक्ति अच्छा है, तब उसके हाथ से गलत कार्य कभी हो ही नहीं सकता।
पिछली विधानसभा में भी अनेक विधायकों और मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। सदन में अनुशासनहीनता के दृश्य देखकर विधायकों को शर्म आना बन्द सा हो गया। मुद्दों के बजाए विरोधी दलों पर छींटाकशी आधुनिक संसदीय सभ्यता की शैली बनती जा रही है। जब विधायक मुद्दों पर तैयारी करकेनहीं आएंगे, देर रात तक अन्यत्र व्यस्त रहेंगे, तब सदन में और क्या कर सकते हैं
अन्य महत्वपूर्ण बात यह भी है कि वे किसी भी दल से चुनकर आए हों, सदन का लक्ष्य एकही होना चाहिए- प्रदेश का हित। इसमें किसी तरह की जाति, धर्म, क्षेत्र अथवा राजनीति को जगह नहीं मिलनी चाहिए। इसके बिना किसी जन प्रतिनिधि की दृष्टि का विकास नहीं हो सकता। तब भावी नेतृत्व का विकास कैसे सम्भव हो सकेगा विधायकों को देश के चुने हुए विशेषज्ञों जैसे सोमनाथ चटर्जी के साथ संवाद कराया जाए। राजनीति को व्यवसाय बनाकर नेतृत्व के सपने नहीं देखे जा सकते। न ही इसके अभाव में विधायिका का सशक्तिकरण हो पाएगा। विधायक झोला लेकर अधिकारियों के पीछे घूमते रह जाएंगे। जनता अब आकलन के आधार पर ही किसी जन प्रतिनिधि को दोबारा अवसर देगी। अगला चुनाव नई पीढ़ी तय करेगी।
विधायक का अपना सचिवालय भी होना चाहिए और उसके कार्यो का नियोजन भी। तबादले कराना पिछली सदी का काम था, आज का नहीं है। अब तो उसे विकास के मुद्दों को समझना है। लोगों से जुडकर रहना है। उनके मूल अधिकारों की रक्षा के लिए कमर कसनी है। धर्म, जाति, वंश और क्षेत्र से ऊपर उठकर। यदि हर विधायकअपने-अपने क्षेत्र पर भी पूरी पकड़ कर लेता है, तो कागजों में होने वाले विकास पर अंकुश लगाया जा सकता है। बशर्ते कि स्वयं विधायक अपने कार्यो में पारदर्शिता बरते। उसका दृष्टिकोण भी व्यापक हो और स्वयं सदा सक्रिय बना रहे। स्थानीय मुद्दों पर सार्वजनिक बहस को बढ़ावा दे सके तो सोने में सुहागा। इससे स्थानीय परिस्थितियां, सम्भावनाएं और विकास के मुद्दे स्पष्ट हो सकेंगे। परम्पराओं और सांस्कृतिक वातावरण का संरक्षण हो सकेगा। यह निरन्तर संवाद ही आधुनिक विकास के मार्ग प्रशस्त करेगा और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण का नया इतिहास रच जाएगा।
गुलाब कोठारी

8 टिप्पणियाँ »

  1. thats great. I like it

    टिप्पणी द्वारा surendra kumar — मार्च 4, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  2. very fine

    टिप्पणी द्वारा Fatah lal rebari — जुलाई 17, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  3. Very nice blog. I want to say something. I’m a resident of Rajsamand and regular reader of Rajasthan Patrika. I’m very much impressed by various social initiatives taken by your group.

    In connection to this I also wanted to contribute my some social responsibility but because financial problems I’m not in a position to do it. Now to overcome this problem I asked for some help from Patrika and for which I also wrote one letter to Patriks also.

    First letter I gave to your Rajsamand branch on 18th May 2009 and then subsequent email to Patrika after almost one month but still there is no response from your side.

    So, sir now it is my genuine request to help me to make Rajsamand green as much as possible.

    Waiting for your positive reply,

    Thanks and regards,

    Langalia Jignesh,
    Rajsamand

    टिप्पणी द्वारा Langalia Jignesh — जुलाई 10, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  4. very nice reports and view.

    टिप्पणी द्वारा amar singh kaviya — जुलाई 6, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  5. bhoot achchha, go on, thanks

    टिप्पणी द्वारा shashibhushantamare — जुलाई 5, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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