Gulabkothari's Blog

अक्टूबर 13, 2009

फैसला तो करो!

भारत आज एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। उसे अपनी क्षमता सिद्ध करते हुए शिखर पर भी पहुंचना है और स्वाभिमान भी बनाए रखना है। सरकार चलाना और नेतृत्व देना एक बात नहीं है। सरकार में फाइलों के, नेताओं और अघिकारियों के पेट भरे जाते हैं। उस धन को हमारे यहां धूल कहा जाता है। नेतृत्व इसे ठोकर पर रखता हुआ कफन बांधकर निकलता है। अपने संकल्प के सहारे। आज संकल्पविहीनता की स्थिति है। कोई दूरगामी निर्णय होते ही नहीं। हमारे अघिकारियों को दौरे करने और हाथ मिलाने का बड़ा शौक है। भले ही पीछे से कोई छुरा मार दे। पिछले साठ साल में हमने केवल पड़ोसियों की शत्रुता कमाई है। देश के टुकड़े किए हैं।

हमारे देश में जो कुछ हो रहा है, धर्म और जाति के नाम पर देश खण्ड-खण्ड हो रहा है, देश के भीतर विषाक्त वातावरण फैल रहा है। जनता में जितनी त्राहि-त्राहि मच रही है, पड़ोसी देश जिस प्रकार मित्रता भुलाकर शत्रु बनते जा रहे हैं, निर्णय लेने के बजाए गम्भीर से गम्भीर मुददों को टाला जा रहा है, देश में अनिर्णय की स्थिति बढ़ती जा रही है, इन सबका एक ही कारण है – देश में कोई नेता नहीं है। किसी भी पार्टी ने देश को नेता नहीं दिया। सबकी नेतागिरी अपनी-अपनी पार्टी तक सिमटी हुई है। चाहे लालकृष्ण आडवाणी हो या सोनिया गांधी। ऎसे ही हमारे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हो गए हैं। इनके आह्वान पर देशवासी किसी मुददे पर कोई पहल नहीं कर सकते। आज जनप्रतिनिघि स्वयं कार्यपालिका पर अघिक निर्भर करते हैं। कार्यपालिका टालमटोल करने के लिए जग प्रसिद्ध है। कुर्सी और नेतृत्व में अन्तर होता है। नेता सभी दलों से ऊपर होता है। उसके समक्ष केवल राष्ट्रहित होता है। इसी के लिए वह जीता है, मरता है। मैंने राहुल गांधी से भी यही कहा था कि उन्हें देश को नेतृत्व देना चाहिए। कांग्रेस को नहीं। कांग्रेस उनके लिए सीढ़ी का कार्य करे, तब कुछ बात बनेगी। वरना उनके साथ भी कांग्रेस का वही सम्बन्ध रहेगा जो पिछली पीढियों के साथ रह चुका है।

देश का दुर्भाग्य है कि विदेश सेवा के अघिकारी केवल यही सपना देखते रहते हैं कि उन्हें कहां का राजदूत बनाया जा रहा है। उन्हें देशहित में तपस्या करने की तैयारी दिखानी चाहिए। इन दिनों चीन और पाकिस्तान दोनों ही हमारे सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। दोनों ने ही आजादी के बाद से अब तक समय-समय पर हमारा दोहन ही किया है, हम मौन बने बैठे हैं। क्या मार्गदर्शन किया विदेश विभाग ने। वह इसी बात से प्रसन्न है कि पाकिस्तान से हमारे रेल और बस मार्ग जुड़ गए। कश्मीर के जरिए व्यापार के रास्ते खुल गए। चीन से हमारा व्यापार सन् 2010 तक 30 अरब अमरीकी डॉलर हो जाएगा। साथ में भले हमारी 30 हजार बीघा जमीन दबा ले। कोई नेता देश के प्रति संकल्पवान ही दिखाई नहीं देता। ढुलमुल नीतियां चल रही हैं। शत्रुता को भी झेल रहे हैं। वार्ताएं भी जारी हैं। एक भी नेता ने स्पष्ट नहीं किया वह देश के हित में क्या करना चाहता है, जिसमें सभी देशवासी सहयोग करें। बकरी रोए जान को, खटीक रोए खाल को। सबसे दयनीय स्थिति यह है कि हम रोज यह जानकारियां दे रहे हैं कि पाकिस्तान और चीन क्या कर रहा है, किन्तु देशवासियों को नहीं पता कि भारत क्या कर रहा है।

पिछले साठ साल में भारत की विदेश नीति के कारण आज सभी पड़ोसी देश शत्रु बन गए। शत्रु ही क्यों लगभग सभी चीन के साथ मित्रता का जामा पहन चुके हैं। आज चीन के पास भारत में प्रवेश के लिए भले ही एकमात्र पाकिस्तान हो, आने वाले समय में यह सभी पड़ोसी देश चीन के लिए भारत प्रवेश का मार्ग बन जाएंगे। क्या हम इसे उपलब्घि मान सकते हैं। इसको देखकर लग रहा है कि सरकार के निर्णयों की प्रतीक्षा किए बिना ही देशवासियों को कुछ निर्णय ले लेने चाहिए। देश की सम्प्रभुता के हित में। आज चीन ने जो कुछ हमारे साथ किया है, वह 1962 की ही पुनरावृत्ति है। सुरक्षा परिषद की सदस्यता के मुद्दे पर भी सबसे बड़ा विरोध चीन ही कर रहा है। एक धोखा पं. नेहरू खा चुके हैं फिर हम छाछ को फू ंककर क्यों नहीं पी रहे? हम जानते हैं कि वहां निर्णय लिए जाते हैं, हमारे यहां टाले जाते हैं। अत: हमें भी तुरंत प्रभाव से चीनी उत्पादों का बहिष्कार कर देना चाहिए। किसी “स्वदेशी अपनाओ” या “भारत छोड़ो” नारे की आवश्यकता नहीं है। चीनी नागरिकों को भारत में प्रवेश करने से रोक देना चाहिए। चीनी सहयोग से चलने वाले उद्योगों को भी बन्द कर देने के लिए दबाव डालना चाहिए। यह तब तक जारी रहना चाहिए जब तक चीन हमारी जमीन छोड़कर वापस न लौट जाए।

गुलाब कोठारी

4 टिप्पणियाँ »

  1. “SATYA MEV JAYTE” – GULAB JI HAS WRITTEN TRUE WORDS WHICH ARE DRAWING A PERFECT PICTURE OF TODAY’S POLITICS,NO DOUBT AT ALL.
    PATRIKA IS DOING A GREAT JOB

    टिप्पणी द्वारा Ankit Sachdeva — नवम्बर 3, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  2. Respectable sir..
    i think about result because The Dicision in Hand of time and time is taking more time for a good dicision.ha. its nuture fact. i think every thing is fix in our nuture we cant take dicision but the nuture have dicided every thing of this earth and for earth life..
    regards
    yogendra kumar purohit
    M.F.A.
    BIKANER,INDIA
    yogendrapurohit@yahoo.com

    टिप्पणी द्वारा yogendra kumar purohit — अक्टूबर 14, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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