Gulabkothari's Blog

अप्रैल 7, 2010

रसविहीन

कोई देखे तो
झगडना
मां-बेटे का
उन मुद्दों पर
जो कभी थे नहीं
परिवारों में
जब से
पनपने लगी है
सोच
समानता की
स्वतंत्रता की
स्त्री
दूर होती गई
अपनी भूमिका से
चूल्हा-चौका
अब नहीं काम
उसका
नौकर बनाने लगा
खाना
भावहीन-नीरस
कैसे संतुष्ट हो
बालक
रोज झगडता है
अच्छे खाने को
मां
तैयार नहीं
बनाने को
होटल में भी
जा नहीं पाते
रोज-रोज
फिर वहां भी तो
खाते हैं
फर्नीचर ही
खाना तो वहां भी
होता है
रसविहीन।
बनाने वाले को
कहां पता है
कौन खाएगा
किसके लिए उडेलंू लाड-प्यार
खाने में
तटस्थ भाव से
बनता है
तटस्थ भोजन
नहीं भर सकता
मन का शून्य
नहीं करता
निर्माण
मन मन्दिर का
‘जैसा खावे अन्न
वैसा होवे मन’
मां के रहते
भावशून्य
बनता जाता है
जीवन
बालक का।

गुलाब कोठारी

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10 टिप्पणियाँ »

  1. नमस्ते सर !
    सर मुझे आपकी ये कविता “रसविहीन” बहुत ही अच्छी लगी . मैं आपसे ये जानना चाहता हूँ की आप ये कवितायेँ, इतने कम समय में कैसे लिख पाते है ? मुझे भी लिखना बहुत अच्छा लगता है , पर मैं अपने आप को सही प्रकार से express नहीं कर पाटा . क्या आप मुझे सुझा सकते है की इसके लिए मुझे क्या करना चाहिए ?

    टिप्पणी द्वारा Ankit Jhankal — अगस्त 3, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  2. I like this poem very much & i think it is much better for those people whose affected by western culture

    टिप्पणी द्वारा Bharti Sharma — अप्रैल 30, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  3. thought provoking indeed.
    But I have a doubt if we can find blessing in prasad prepared by a confectioner offered to deity then can’t we find affection in the food prepared by a maid but offered by a mother?

    टिप्पणी द्वारा aditya — अप्रैल 17, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  4. absolute correct, now days mother is trying to run away from the responsibility, day boarding school is the correct example of it.later on there will be gross il-effect of this culture , children will not do there responsibility/duty.

    टिप्पणी द्वारा dr deepak sahu — अप्रैल 8, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  5. kya baat hai gulab saheb aap ka jawab nahi rasvihin bahut satik likha hai………..apka har lekh ek se badkar ek hai.

    टिप्पणी द्वारा SUNIL MAHESHWARI — अप्रैल 7, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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