Gulabkothari's Blog

फ़रवरी 3, 2011

भले पधार्या!

सम्माननीय भागवत जी,
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत राजस्थान की खैर-खबर लेने अजमेर आए हुए हैं। वे पांच दिन के प्रवास पर अजमेर में हैं। संगठन की विभिन्न स्तर पर जानकारियां करेंगे। निष्कर्ष निकालेंगे, फिर निर्णय भी करेंगे। ऎसे ही कुछ निष्कर्ष आपने दिल्ली में भी निकाल कर देश के सामने रखे थे। एक निष्कर्ष यह भी था कि संघ भाजपा के कामकाज में दखल नहीं करेगा। भाजपा को राख से भी उठ खड़ा होना आता है। भागवत ने भी देख लिया होगा कि उनके दोनों ही दावे ढह गए। देश को जो आशाएं आपके आने पर बंधी थीं, वे तो गड़करी के अध्यक्ष पद पर मनोनयन के बाद ही धूमिल हो गई थी। आज संघ भले ही आपसे कुछ उम्मीदें रखता होगा, देश तो आपका नाम लगभग भूल चुका है। आप ही बताएं कि पिछले साल-दो साल में संघ ने देश के विकास में कौनसी महत्ती भूमिका निभाई! अनेक कारणों से भाजपा को नीचा ही देखना पड़ा है। इसमें एक कारण गड़करी पुत्र के विवाह की चर्चा भी है। देश के सामने आपकी सकारात्मक भूमिका को लेकर प्रश्नचिन्ह है। देश के विकास को आज किसी भी प्रतिक्रियावादी संगठन की आवश्यकता नहीं है। संघ इसमें बहुत आगे निकल गया है। जिस प्रकार संघ अब सत्ता पर हावी होने लगा है, जिस प्रकार गड़करी वसूली अभियान के पर्यायवाची बन गए, जिस प्रकार सुरेश सोनी जैसे पदाधिकारियों के द्वारा प्रश्रय प्राप्त लोग संघ का मान बढ़ा रहे हैं, उससे एक ओर संघ कटघरे में खड़ा हो गया, वहीं भाजपा के नेता किंकत्तüव्यविमूढ़ हो गए। जिस तरह के नए दबाव इन नेताओं के सामने अब आ रहे हैं, कभी सुने भी नहीं थे। संघ की कथनी-करनी का अन्तर जनमानस की जुबान पर आ गया। भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरूण जेटली आदि जब अपनी-अपनी कुर्सियां खींच रहे थे, तब आप मौन क्यों थे। यह कहकर उत्तर टाल नहीं सकते कि भाजपा की भाजपा जाने। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के भाजपा अध्यक्ष आपकी निष्पक्षता के प्रमाण हैं।

आज भाजपा जिस प्रकार नेताओं को मनोनीत करने लगती है, चयन का और व्यक्ति की गुणवत्ता का मार्ग बहुत पीछे छूट गया है। आपने देखा है राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के साथ संघ के बड़े संचालकों ने कैसा व्यवहार किया था। उत्तराखण्ड के भुवनचन्द्र खण्डूरी (पूर्व मुख्यमंत्री) को कैसे मक्खी की तरह हटा दिया गया था। कैसे कर्नाटक का नाटक पार्टी के ही लोगों ने देश के सामने खेला, कैसे मध्यप्रदेश में उमा भारती गई, फिर बाबू लाल गौर का पत्ता साफ हुआ और अब फिर शिवराज सिंह चौहान को हटाने के लिए नए सिरे से मुहिम चलाई जा रही है। आज भी मुस्लिम नेता भाजपा में सहज नहीं हैं। भाजपा की कार्यकारिणी देख सकते हैं। अटल जी के मंत्रिमण्डल पर भी दृष्टि डालें तो समझ जाएंगे।

खुलेआम अपराध प्रवृत्ति के नेताओं को आपके नेतृत्व में संघ प्रश्रय दे रहा है। क्या भाजपा और संघ मिलकर देश को और कुछ देना ही नहीं चाहते। क्या कश्मीर के निष्कासित हिन्दू कभी आपका एजेण्डा बनेंगे। बिना इसके जब कश्मीर में चुनाव हुए तब आप मौन क्यों थे? बांग्लादेशियों के इतने बड़े अतिक्रमण पर आपके अभियान सुप्त क्यों? आरक्षण जैसे नासूर और धार्मिक कट्टरवाद पर आपको सांप क्यों सूंघ गया? क्यों भाजपा को इसके लिए तैयार नहीं किया जाता? जो कुछ पिछले 10-15 सालों में कश्मीर में हुआ, उसे भी आप भारत माता का सम्मान मानते हैं, तब हमें और कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है। ऊपर के गिने-चुने नेताओं ने निजी स्वार्थ पाल लिए हैं। देश उन पर थू-थू भी कर रहा है, नीचे कार्यकर्ता भी शर्मिन्दगी का अनुभव कर रहा है। हाल ही में आपने कहा था कि संघ में कट्टरवाद को स्थान नहीं है। क्या इसका अर्थ यह भी है कि हिन्दूत्व की रक्षा संघ का उद्देश्य नहीं रहा। हिन्दूवाद के कारण ही संघ का स्वरूप है। कट्टरवाद से लड़ने के लिए नहीं है, भागवतजी! शाखाओं का सूखते जाना ही प्रमाण भी है। नई पीढ़ी का शाखाओं से मोहभंग हो गया। क्या यही है संघ की भावी तस्वीर?

आप राजस्थान आए हैं। स्वागत है! किन्तु जाने से पहले उन घावों को अवश्य देख जाएं जो शंकर जी और प्रकाश जी अथवा इन्द्रेश जी के खातों में हैं। जिस प्रकार के हस्तक्षेप का दु:साहस सुरेश सोनी भी यहां दिखाते रहे थे। गुलाब चन्द कटारिया, घनश्याम तिवाड़ी, ललित चतुर्वेदी आदि के इतिहास के पन्ने भी पलट जाना। आमजन से बातें कर सकें तो और भी उत्तम रहेगा। धन की मर्यादा संघ के नेताओं में मृत प्राय: हो गई है। इनके दबाव से ही भाजपा के भ्रष्टाचार का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। किसी को भी लज्जा नहीं आती। कांग्रेसी को लज्जा नहीं, तो मुझे ही क्यों? आपसे एक अनुरोध है कि जाने से पहले पुष्कर जाकर यह संकल्प अवश्य कर जाएं कि शेष जीवन भारत माता को समर्पित रहेगा, भाजपा को नहीं शायद देश की आशाएं फिर जाग उठें!
गुलाब कोठारी

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