Gulabkothari's Blog

अगस्त 5, 2011

समिति क्यों?

श्रीमती सोनिया गांधी इलाज के लिए अमरीका गई, यह एक दुखद बात है। आज भी इस देश में हम देशवासियों का इलाज करने की स्थिति में नहीं आ सके। इससे भी अघिक आश्चर्यजनक बात यह कि उनके पीछे से उनका कार्य एक चार सदस्यीय समिति देखेगी। इसमें राहुल गांधी के अलावा अहमद पटेल, ए.के. एंटनी तथा जनार्दन द्विवेदी हैं। इस कमेटी के गठन से अनेक प्रश्न पैदा हो गए हैं।

 

सोनिया गांधी कब यात्रा पर गई, इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई। यह कहना कि इलाज के लिए किस देश में गई यह भी पार्टी या सरकार को नहीं मालूम, हास्यास्पद लगता है। कोई देशवासी इस तर्क को मान लेगा, संभव नहीं है।

 

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा है कि श्रीमती गांधी को 2-3 सप्ताह लग सकते हैं। क्या यह इतनी बड़ी अवघि है कि जिसके लिए पीछे से समिति का गठन आवश्यक हो। अनेक उदाहरण विश्व में होंगे, जबकि इससे बड़ी अवघि के लिए शीर्ष लोग बाहर गए और कोई समिति नहीं बना गए। आज जिस प्रकार के सूचना तंत्र में हम बैठे हैं, विकीलीक्स जैसे संगठन जैसा कार्य कर रह रहे हैं, भ्रष्टाचार के चलते जब किसी को भी खरीदा जा सकता है, तब क्या कोई रहस्य टिक सकता है? सरकार की भूमिका कहीं दिखाई नहीं पड़ी।

 

राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का या सरकार के कार्यो का भार भी क्या इस समिति को दिया गया है? क्या राहुल गांधी भी नहीं जानते कि उनकी मां इलाज के लिए अमरीका गई हंै? उनको यह भी पता है कि बीमारी क्या है और यह भी कि वे 2-3 सप्ताह में नहीं लौट पाएंगी। इस बात से ही बीमारी का अनुमान लगाया जा सकता है। राजधानी में तो बीमारी के बारे में बहुत कुछ बाते चर्चा में आ चुकी हैं। क्या यह सरकार का दायित्व नहीं है कि वह देशवासियों को विश्वास मेें लेने का प्रयास करें? अभी तो स्पष्ट ही है कि कांग्रेस पार्टी और सरकार दोनों ही वस्तुस्थिति को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं।

 

ढाका से सीधे इलाज के लिए चले जाना एक गंभीर अथवा आपातकालीन कदम ही माना जाएगा। देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के मामले में सरकार का यह रवैया उचित नहीं कहा जा सकता। जनता को रोग और चिकित्सा की जानकारी मिलती रहनी चाहिए। भले ही कैंसर ही क्यों न निकले। यह व्यक्ति के बस की बात नहीं है। इसके साथ ही यह भी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि 2-3 सप्ताह के लिए इस समिति की क्या आवश्यकता है?

 

गुलाब कोठारी

 

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