Gulabkothari's Blog

सितम्बर 14, 2011

माननीय

आदरणीय आडवाणी जी,

सादर प्रणाम,

आप फिर एक रथ यात्रा पर निकल रहे हैं। आपके लिए यह तीर्थाटन है या पर्यटन, मालूम नहीं, लेकिन देश आपसे बहुत से सवाल पूछना चाहता है। उनमें से कुछ मैं इस पत्र के माध्यम से आपके सामने रख रहा हूं। सबसे पहले क्या आपने अपनी पार्टी के नेतृत्व से इस यात्रा की इजाजत ले ली है? या फिर यह आपकी इकतरफा घोषणा है?

 

आपने अपनी यात्रा का आगाज सरदार पटेल की जन्मस्थली से करने का निर्णय किया है, ऎसा सुनने में आया है। अगर ऎसा हुआ तो क्या आप देश के उस सवाल का जवाब देने को तैयार हैं कि कंधार में आईसी 814 के अपहरणकर्ताओं को छोड़ने का फैसला तब हुआ जब आप देश के उपप्रधानमंत्री थे। क्या आपके पास उस सवाल का जवाब है कि आपके गृहमंत्री रहते हुए पुरूलिया हथियार काण्ड के मुख्य अभियुक्त पीटर ब्लीच को क्यों छोड़ा गया? क्या आपको फिरोजाबाद के एहसान अली का नाम याद पड़ता है? इस बीच, एक बात और याद आती है कि उसी गुजरात में पिछले सात साल से आपकी भाजपा सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं कर पाई है, और आप वहां से सांसद भी हैं। ऎसा बताया गया है कि आपकी यात्रा भ्रष्टाचार के खिलाफ हो रही है। सही है न।

 

फिर शायद आप मध्य प्रदेश जाएंगे। वहां पिछले लोकायुक्त की रिपोर्ट की आपको जानकारी मिली होगी। उसमें डंपर की खड़खड़ाहट आपको सुनने को मिली होगी। इंदौर में भूमाफिया के साथ आपके मंत्रियों की संलग्नता के किस्से भी वहां ही नहीं, दिल्ली में भी किवदंती बन चुके हैं। आपको पत्रिका के साथ-साथ दूसरे अखबारों में भी पढ़ने को मिले होंगे। बगल के छत्तीसगढ़ में आपके अपने कार्यकाल में नक्सलियों के साम्राज्य का कितना विस्तार हुआ, यह आपके गृह मंत्रालय की फाइलों में दर्ज है।

 

छत्तीसगढ़ के पड़ोस में ही झारखंड है। सुना है कि जब वहां पिछले साल दोबारा आपकी सरकार बन रही थी तो आप बहुत विचलित हुए थे। आपको लगा था कि भ्रष्टाचार में डूबे सोरेन के साथ कैसे सरकार बनाई जा सकती है। लेकिन आपने उसे किन परिस्थितियों में बनाना स्वीकार किया यह देश के लिए कौतुहल का विषय है। बिहार में भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का श्रेय आपकी पार्टी से ज्यादा नितीश कुमार को जाता है। उत्तर प्रदेश में आपकी सरकार नहीं है, लेकिन आपको वहां आपकी 1992 की कसम की याद तो जनता दिलाएगी ही। उत्तराखंड में अगर आपको नेतृत्व परिवर्तन का फैसला करना पड़ा है तो इसलिए नहीं कि वहां भ्रष्टाचार सिर के ऊपर से गुजर गया था, बल्कि इसलिए कि वहां आपको जल्दी ही होने वाले चुनावों का सामना करना पड़ रहा है।

 

हरियाणा में स्वर्गीय भजनलाल की पार्टी से समझौता करके आपने अपने कैडर को क्या संदेश दिया है, पता नहीं, लेकिन देश की जनता को समझ आ गया है कि शुचिता के मुकाबले राजनीतिक प्रैग्मेटिज्म आप पर कितना हावी है। पंजाब में आपके अपने मंत्री सीबीआई के शिकंजे में आ चुके हैं। आपकी पार्टी के ही सदस्य खुलेआम बाकी मंत्रियों के बारे में भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाते हैं वे आपको मिल ही गए होंगे। न मिले हों, तो कृपया बताएं, मैं व्यवस्था करने का प्रयास करूंगा। आपके सहयोगी अकाली दल के बारे में तो जितना कहा जाए उतना कम है।

 

कर्नाटक में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे मुख्यमंत्री को आपको हटाना पड़ा। लेकिन उनसे भी कहीं ज्यादा विराट भ्रष्टाचार में घिरे रेaी बंधुओं को सरकार में बनाए रखने के लिए पिछले दो साल में आपकी पार्टी ने और स्वयं आपने कितनी मेहनत की यह पूरा देश जानता है। 2009 में तो आपको जन्मदिन का तोहफा ही यह दिया गया था न। जिस दिन तक जनार्दन रेaी को सीबीआई ने जेल नहीं भेजा, उस दिन तक भी उन भाई लोगों को सरकार में बनाए रखने के लिए आपकी पार्टी कितनी जोड़-तोड़ कर रही थी, यह किसी से छिपा नहीं है।

 

संयोग ही है कि उसी राज्य के अनंत कुमार को आपकी यात्रा का संयोजक बनाया गया है। अगर कहीं प्रशांत भूषण को याद आ गया कि उन्होंने अनंत कुमार के खिलाफ 14 हजार करोड़ रूपए के हुडको घोटाले में पीआईएल दायर कर रखी है और कहीं कोर्ट ने नीरा राडिया पर आरके आनंद की किताब से पाबंदी हटा ली तो क्या आपकी यात्रा में खलल नहीं पड़ जाएगा।

 

आपकी पार्टी ने हाल ही में बताया है कि पिछले साल उसे सिर्फ 36 करोड़ रूपए की आमदनी हुई। क्या आपको इस आंकड़े पर विश्वास है। इतने पैसे तो आप नेता लोगों की हवाई यात्राओं पर ही खर्च हो गए होंगे। पर शायद नहीं, वो तो आपके मध्य प्रदेश के सरकारी प्लेन जिसे लोग प्यार से कमल एयर टैक्सी सर्विस कहकर पुकारते हैं, उसके कारण बच गए होंगे।

 

आडवाणी जी, भ्रष्टाचार सिर्फ रिश्वत लेने-देने से ही नहीं होता। भ्रष्ट आचरण भी इसी दायरे में आता है। पार्टी नेताओं के प्रतिभाशाली बेटे-बेटियां पार्टी शासित राज्यों में काम के लिए मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों को किस तरह सीधे फोन करके विभिन्न कायोंü के लिए दबाव डालते हैं, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी पसंद का ओएसडी लगाने के लिए प्रदेशों की राजधानियों के कितने ही चक्कर लगाते हैं ताकि वे उनकी फाइलों को फॉलो-अप कर सकें, इसकी सूचना भी पार्टी तंत्र को लगती ही रहती होगी।

 

इस यात्रा पर निकलने से पहले आपको कम से कम यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि, जिन-जिन राज्यों से आप गुजरेगे उन राज्यों के भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ पार्टी कार्रवाई करेगी। इसके बिना भ्रष्टाचार के खिलाफ आपकी यात्रा का कोई अर्थ नहीं है। वह मुखौटा जैसी रहेगी। कुछ वर्ष पहले का संघ का वह निर्देश तो आपको याद होगा ही कि, कोई आंदोलन करना है तो पार्टी से बाहर आकर करो। तभी हम साथ देंगे। यात्रा पर निकलने से पहले जरा यह भी देख लें कि, पार्टी कार्यकर्ताओं में आपकी छवि आज भी वैसी ही है क्या जैसी बीस साल पहले थी? छब्बे बनने के चक्कर में कहीं दुब्बे जी न रह जाएं।

 

एक बात और, आपकी इस यात्रा पर सुरक्षा व्यवस्था में जो करोड़ों रूपए खर्च होंगे, क्या उसका हिसाब लगाया है आपने। आपके राजनीतिक हितों को साधने के लिए जनता पर करोड़ों रूपए का बोझ डालना क्या आपको अनुचित नहीं लगता।

 

पुनश्च: आपकी पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं को एक बात समझ नहीं आ रही है। कालेधन के बारे में आपके ही एस. गुरूमूर्ति की टास्क फोर्स के दावों पर पहले तो आपने प्रेस कांफ्रेंस की और फिर श्रीमती सोनिया गांधी से माफी मांगकर अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया। दूसरी तरफ, भ्रष्टाचार के मामले में आपको क्वात्रोची और हसन अली ही क्यों याद आते हैं। शाहिद बलवा का नाम लेते हुए आपकी व पार्टी की जुबान क्यों लड़खड़ा जाती है।

प्रति: श्री मोहनराव भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, महाल, नागपुर

 

गुलाब कोठारी

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