Gulabkothari's Blog

मार्च 11, 2012

कठोर या मुलायम!

उत्तर प्रदेश विधान सभा के ताजा चुनाव परिणाम देश को नई दिशा में ले जाते दिखाई पड़ते हैं। मतदाता की परिपक्वता और चुनाव आयोग की भूमिका दोनों का श्रेष्ठ उदाहरण भी। दोनों राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को न केवल धूल ही चटाई, बल्कि उनके मुखौटे भी उतार दिए। मतगणना के दिन तक सारे बुद्धिजीवी एक ही अनुमान के सहारे परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे थे कि किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलेगा।

 

 

सब अपने-अपने चश्मों से देख रहे थे। लोग चश्मा उतारकर देखना ही भूल गए। न अपनी गलती को स्वीकार करते हैं। ठीक करना तो संभव ही नहीं रहा। लेकिन सबके गणित फेल कर दिए नए मतदाता ने। मत का पूरा उपयोग किया। सही दिशा में किया। यह भी जाहिर कर दिया कि सफेदपोश दिखाई पड़ने वाले गुण्डों से भी खराब हैं। अगले आम चुनाव में नया मतदाता बहुत बड़ी संख्या में जुड़ेगा। परिवर्तन भी बड़े आएंगे। जहां विकल्प मिलेगा, वहीं तीसरा मोर्चा पैदा कर देंगे।

 

उत्तर प्रदेश सरकार को भी अपनी कार्यशैली को आमूल-चूल बदलना होगा। अब राजनीति का उपयोग आपसी राग-द्वेष एवं घोटालों में लगाने के बजाय विकास में करना होगा। कथनी और करनी को एक करना होगा। सपा कार्यकर्ताओं की मानसिकता को नियंत्रण में रखना भी एक बड़ी परीक्षा होगी। मुलायम सिंह ने अपनी प्रथम भेंट में ही राज्यपाल महोदय को आश्वासन दे दिया कि दंगाइयों के विरूद्ध कार्रवाई करेंगे। चाहे वे सपा के कार्यकर्ता ही क्यों न हों। साथ ही इस आशय के आदेश भी जारी कर दिए। यदि यह बदलाव उनकी दृष्टि का है तो हमें बहुत कुछ अपेक्षा हो सकती है। यदि मात्र लोकाचार ही इसका कारण हुआ तो सपा की पांच साल की यात्रा बेकार ही जाएगी।

 

समाजवादी पार्टी ने जो कीर्तिमान एवं बदलाव का आश्वासन देश के सामने रखा है, उसे कर दिखाने का संकल्प भी कर लेना चाहिए। इस दृष्टि से मुलायम सिंह का कार्यकर्ताओं को किया गया यह संबोधन महत्वपूर्ण है कि, ”यदि मुझे देश का प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हो, तो अनुशासन में रहना होगा।” बहुत सकारात्मक पहलू है। भावी दृष्टि भी है, संकल्प भी है और नेतृत्व की दिशा भी।

 

अब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री का कार्य देखेंगे। इसी के साथ मुलायम सिंह भी यदि अनुशासन की इस मुहिम को प्रदेश भर में चलाने का निरन्तर प्रयास करें, तो यह सपना साकार होने में कठिनाई नहीं आएगी। आज अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री यह सपना ही नहीं देख रहे। झूठ बोलकर बटोरने का पुण्य कमा रहे हैं। क्या कर पाएंगे इसका, वे भी नहीं जानते। अच्छा कर पाने की स्थिति में तो नहीं हैं। मुलायम सिंह चाहें तो इस अवसर पर पुत्र के मुख्यमंत्री बनने का लाभ ”ईश्वर का प्रसाद” मानकर उठा सकते हैं। नया इतिहास बना सकते हैं।

 

भले ही अखिलेश मुख्यमंत्री हों लेकिन उनके कार्यो और परिणामों का उत्तरदायित्व तो मुलायम सिंह पर ही माना जाएगा। जहां वे यह तय कर सकते हैं कि, जिन कारणों से वे सत्ता से बाहर कर दिए गए थे उसका रूपांतरण नए नेतृत्व, नई पीढ़ी और अखिलेश के माध्यम से प्रस्तुत होगा। वर्तमान भले ही अखिलेश का दिखाई दे किन्तु मूल में मुलायम ही माने जाएंगे। अपनी पीढ़ी के आपराघिक मानसिकता वाले संगी-साथियों से अखिलेश का बचाव भी करेंगे। वरना इस परिस्थिति से ऊपर उठने के रास्ते उनके लिए भी बंद हो जाएंगे।

 

गुलाब कोठारी

 

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