Gulabkothari's Blog

जून 24, 2012

मोहन जी की भागवत

Filed under: Special Articles — gulabkothari @ 7:00
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कौन कह सकता है आज की भाजपा भारतीय संस्कारों से ओत-प्रोत राजनीतिक दल है। आज तो दल भी नहीं, दलदल रह गया है। मानसिक रूप से अपाहिज नेताओं की फौज जिसने चिन्तन-मनन को तिलांजलि दे दी। कार्यकर्ता तो आज भी मरने-मिटने को तैयार हैं। अपराधियों का देशव्यापी संग्रहालय बन चुका है। क्या होना बाकी रह गया इस दल में? अब इसे दुर्भाग्य कहा जाए अथवा इनकी दुर्बुद्धि कि बार-बार चेतावनी सुनकर भी ढीठ ही बने रहे। अपराध ही करते रहे। आज ठीकरे का एक कोना फूटा तो राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर सहमति नहीं हुई। दल में बिखराव आ गया। रिश्तेदार कपड़े झाड़कर भाग खड़े हुए। जब ठीकरे का दूसरा कोना फूटा तो भीतर सारे नंगे नजर आए।

बेल्लारी, शहला मसूद, अवैध खनन, अवैध हथियार, मादक पदार्थ, शराब जैसे रावण की लंका के सारे विशेषज्ञ भाजपा में दिखाई दे गए। आयकर छापे भले ही कहने को दिलीप सूर्यवंशी और सुधीर शर्मा के पड़े हों, किन्तु सत्ता के इर्द-गिर्द बैठे सारे महारथी भाजपा के शरीर को दोनों हाथों से नोचते दिखाई पड़ गए।

जिन-जिन के नाम पिछले वर्षो में पत्रिका ने उठाए, जिन कारणों से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारों का कोपभाजन होना पड़ा, वह अब सारे सही साबित हो गए। इसके लिए सेहरा किसके सिर बंधना चाहिए? नितिन गडकरी के, सुरेश सोनी के, शिवराज सिंह या रमन सिंह के, अथवा गैर राजनीतिक संगठन के शीर्ष पुरूष मोहन भागवत के। संघ के इतिहास में शायद पहली बार सरसंघ चालक ने सीधे राजनीति की बात की है, जब उन्होंने नरेन्द्र मोदी का हिन्दूवादी पक्ष उठाया। भाजपा सहित सारा देश सकते में आ गया। बड़े पदों पर कांग्रेस की तरह उम्मीदवार तय करके वे भी लोकतंत्र का गला बहुत पहले ही घोंट चुके हैं। अब क्या करना चाहते हैं? संघ का व्यक्तित्व होता तो यह सब सहन होने का प्रश्न ही नहीं था। अब तो लगता है राजनीति का खून इनके मुंह पर भी लग गया है।

मोहन जी के भागवत पुराण को पढ़कर तो कोई देखे। कहीं कोई दिशा या लक्ष्य अथवा प्रशासनिक पकड़ उनके निर्णयों में नहीं बची है। वे कब राजनीति में रहेंगे, कब बाहर रहेंगे, पता नहीं। भाजपा के मुखौटे लगाए संघ के कौन-कौन शकुनि मामा दुर्योधन की मूर्खता और अहंकार का मजा ले रहे हैं। मोहन जी अनजान बनकर हिन्दूवादी राग अलाप रहे हैं। हिन्दुओं के किसी मुद्दे को (कश्मीरी पण्डित, अयोध्या, बांग्लादेशी आदि) संघ ने हाथ में लेकर निर्णायक स्थिति तक पहुंचाया नहीं है। भागवत जी को इसका उत्तर देश के सामने रखना चाहिए। क्यों उन्होंने भाजपा के सिर पर गडकरी को थोपा और आज जब पूरा देश आलोचना कर रहा है तब वे चुप क्यों हैं? क्या भागवत पुराण में सुरेश सोनी की कथा नहीं लिखी? मुम्बई और नागपुर अधिवेशन में क्यों इनके नाम पर मोहन जी ने स्वीकृति दी? आज जब इतने बड़े-बड़े काण्ड सामने आ गए, भागवत जी गूंगे क्यों हो गए?

क्या इनके विरूद्ध संघ भी अलग से कानूनी कार्रवाई करेगा या कांग्रेस की तर्ज पर फाइलें बन्द कर देगा? आपको भी ज्ञात होगा कि संघ में गोलवलकर जी-देवरस जी जैसे सरसंघ चालक रहे हैं। यदि उसी फीते से मापें तो हमारा कद कैसा दिखेगा?

संघ के नेताओं ने देश के हिन्दुओं का भी कम अपमान नहीं किया। विश्व हिन्दू परिषद, शिव सेना और बजरंग दल आदि ने क्या नहीं किया। अब समय दूर नहीं, जब नई पीढ़ी देश के हिन्दुओं को गुमराह करने के लिए संघ से और मुसलमानों को गुमराह करने के लिए कांग्रेस से हिसाब मांगेगी।

कान आप किधर से भी पकड़ लें, गलतियां सारी मोहन भागवत की निकलेंगी। खोटे लोगों को, क्षेत्रीयता को, अपराधियों को खुली छूट देना संघ की परम्परा तो नहीं है। आज किसी पदाधिकारी को इस बात का दर्द भी नहीं है कि नीचे के कर्मठ और कर्मनिष कार्यकर्ता पर क्या बीत रही होगी। क्या ऎसे पदासीन असुरों को पालने के लिए ही प्रचारकों ने अविवाहित रहने का संकल्प किया था? ऊपर वालों के सेक्स काण्डों की कहानियां पढ़-पढ़कर देशवासी शर्मसार हो गए। मोहन जी क्यों नहीं हुए? सुरेश सोनी जैसे पदाधिकारी मध्यप्रदेश का शासन चलाएं, प्रभात झा खड़ाऊं सिर पर लिए उनके प्रतिनिधि रूप में कार्य करें। जिन-जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगें, वे सब राज्य सभा में? एक भी हिन्दू संस्कार भाजपा के शीर्ष पदों पर नहीं दिखेगा। होता तो अनेक अभियान छिड़ चुके होते।

अब भागवत पुराण का अन्तिम अध्याय स्वयं मोहन जी को लिखना है। भाजपा को बचाना है तो ऊपर के 150-200 नेताओं को घर बिठा दो। संघ को बचाना है तो भाजपा से बाहर आ जाओ। वरना उद्घोष कर दो कि “संघ और कांग्रेस भाई-भाई”। जनता किसी को भी चुन ले ।

गुलाब कोठारी

4 टिप्पणियाँ »

  1. itne Tikhe lekh ke liye badhai
    ummid hai BJP on Sangh kuch samjhegii

    टिप्पणी द्वारा piyushd300 — अगस्त 18, 2012 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  2. अत्यंत विचार प्रधान लेख के लिए गुलाब कोठारी साहब को साधुवाद।

    टिप्पणी द्वारा prabhatkumarroy — जुलाई 23, 2012 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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