Gulabkothari's Blog

जुलाई 8, 2012

कविताएं

जुड़ने लगा है

 

मन तुम्हारा

आद्या

वस्तुओं से

कभी जूते

कभी पर्स,

कभी बेबी

खिलौने का

नहीं देती छूने

किसी नए को,

फेंक देती हो

तुम भी

नया आते ही।

ऎसा ही मन

आद्या

ऊबने लगता है

जल्दी ही

पुरानेपन से,

चाहता है

बदल देना

जितना जल्दी,

तब कष्ट देता है

मन

जुड़ने के कारण

बिछोह में।

 

सीखने लगी

बहाने भी

न जाने के

न खाने के

न करने के,

खिसक जाने के

टाल देने के,

फिर हंसती हो

विजेता बनकर

बजाती हो

तालियां भी

चिढ़ाने को,

प्रवेश हो रहा है

तुम्हारा, आद्या

क्षरणधर्मिता मे!

 

करने लगी नकल

शब्दों की,

गानों की

नृत्यों की

भावों की,

रमने लगी

टीवी पर

देखकर गाने

अपनी पसन्द के,

इन सब में

भरा है भाव

प्रसन्नता का

स्वयं संतुष्टि का

यही पूजा है

जीवन की!

आद्या!!

 

कौन भरता है

रंग, आद्या

अण्डे में

मोरनी के?

जिस तरह से

फैलाती हो

रंगों को तुम

कागज पर,

हथेली पर

होकर दत्तचित्त

लगता है

करती हो तैयार

अण्डे मोरनी के

तुम्ही, आद्या!

 

‘बनने लगी हैं’

कलाएं

आद्या की,

कला भी

काल भी

माया और विद्या

नियति सहित,

राग-द्वेष्ा

अभिनिवेश

ईष्र्या

बालस्वरूप में

लगते हैं

श्ृंगार जैसे

जीवन के।

 

जम्पी-जम्पी

झुआ-झुआ

गोदी-गोदी

क्या पसन्द है

तुम्हारी आद्या,

और फिर नृत्य

गौरजां का,

चकरी खाकर,

गीत गाकर

मानो झुलाती हो

उसको भी

साथ-साथ

अपने नृत्य में।

 

दे दिया तुमने

मां का दर्जा

छोटी मां को

आद्या,

और छीन लिया

अगस्तू से भी

उसका अघिकार,

नहीं आने देती

उसको गोदी में

अपनी मां की,

सौंप देती हो

अपनी मां को

उसे,

छीन लेती हो

खिलौने भी

झूले भी

उसके हाथ से,

और लौटा देती हो

सब कुछ फिर

शेयरिंग (बांटने)

के नाम पर।

कैसे लौटाओगी

भावनाओं को

जो हुई उद्वेलित

उस काल में।

 

बात अचरज की

छोटा बाबू

पास तुम्हारे

अगस्तू,

सबसे प्यारा,

सबसे न्यारा,

और फिर भी

एक और बाबू

छोटा खिलौने का,

गोद में तुम्हारे,

रखता है व्यस्त

तुमको आद्या

अगस्तू की जगह,

सोचना क्यों?

 

चाहता है

तोड़ लेना हर कोई

गुलाब को,

मना कर दो यदि

तो जुड़ जाएंगे

कुछ नए कांटे

उसके साथ।

चढ़ना है उसे भी

सिर पर

किसी देव के,

अथवा कुचले जाना

किसी निर्मम हाथ।

 

गुलाब कोठारी

 

2 टिप्पणियाँ »

  1. wah sir kya likha hai…… great…
    sir i also write poem and keen to publish in Rajasthan Patrika
    can u just provide me any contact details

    टिप्पणी द्वारा rajpal sharma — अगस्त 9, 2012 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • आभार। कविता मैगजीन सैक्शन में भेजें। मैगजीन सैक्शन, राजस्थान पत्रिका, जवाहर लाल नेहरू मार्ग, केसरगढ़, जयपुर-302004

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — अगस्त 30, 2012 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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