Gulabkothari's Blog

सितम्बर 10, 2012

एक और आरक्षण

जैसे-जैसे विभिन्न प्रदेशों में स्थानीय भुज-बल का प्रभाव बढ़ रहा है, वहां लोकतंत्र पंगु हो रहा है। भुज-बल के पीछे धन-बल और धन-बल को प्रेरित करता है सत्ता-बल। देश में आज भ्रष्टाचार का माहौल काले धन, भुज-बल यानी दादागिरी और तस्करी के लिए जिम्मेदार है। हर प्रदेश की राजधानी में डण्डे के जोर पर चौथ वसूली करने वालों का बोलबाला है। जमीनों पर अतिक्रमण, मकानों पर कब्जे, शराब, मादक द्रव्यों और हथियारों का धन्धा भी इन्हीं के हाथों में है। इन पर हाथ डालना सम्भव नहीं है, क्योंकि धन तो सारा सफेदपोश लोगों का है।

उससे भी बड़ा कैंसर इस देश को लग गया है, जो कई अर्थो में आरक्षण का बड़ा भाई है और देश को बांटने में अग्रणी होता जा रहा है। यह है- भाषा का नासूर और इसे हवा देते हैं कुत्सित मानसिकता वाले राजनेता तथा भुज-बल आधारित संगठन, जो राजनीति पर ही आश्रित होते हैं।

हमने कितने प्रदेशों में भाषाई अलगाव देखा है। पहले तो केवल दक्षिण भारत में हिन्दी विरोधी वातावरण बना और इसको लेकर कई आन्दोलन हो गए। हालांकि हिन्दी सिनेमा सब देखते थे, हिन्दीभाषी उद्योगपतियों के यहां नौकरी करते थे। चेन्नई का साहूकारपेट और बेंगलूरू का चिकपेट आज भी मूलत: हिन्दीभाषियों के सबसे बड़े बाजार हैं। यह घृणित राजनीति का ही प्रताप है कि वहां के नागरिक हिन्दी के विरोध के कारण देश के अन्य प्रान्तों में नहीं बस पाए। इसका लाभ केरलवासियों को मिला। शिक्षा भी इनकी मददगार बन पाई।

महाराष्ट्र ने जो मुहिम लोगों पर थोपी, डण्डे के जोर पर मराठी भाषा तथा गैर-मराठी लोगों को प्रताडित करने की, उसने लोकतंत्र, धर्म, शिक्षा, संस्कृति सबको शर्मसार कर दिया। तमिलनाडु और कर्नाटक (कन्नड़) भी इस दौड़ में आगे बढ़े। इन्होंने अपने प्रान्तों के नाम तक बदल डाले। इस राजनीतिक रूपान्तरण ने इन प्रदेशों के नागरिकों को अपने ही देश में कैद कर दिया। शेष भारत से इनका तारतम्य लगभग टूट सा गया। अब पश्चिमी बंगाल और असम की ओर से आवाजें उठ रही हैं।

इस बीच मुम्बई में शिवसेना ने बिहार के लोगों से जो निशाना बनाकर दुर्व्यवहार किया, अपशब्दों तथा भुज-बल का प्रयोग किया, वह लोकतंत्र के इतिहास को कलंकित कर गया। आज भी राज ठाकरे का यह कहना कि “मुम्बई में प्रतिदिन 48 ट्रेनें यूपी, बिहार होकर आती हैं और उन्हीं के जरिए अपराधी मुम्बई आते हैं और उन प्रदेशों के मुख्यमंत्री अपराधियों को संरक्षण प्रदान करते हैं”- एक बचकाना, दम्भपूर्ण और लोकतंत्र के लिए अपमानजनक वक्तव्य है।

उनको यह तो सोचना ही पडेगा कि वे किसी मुख्यमंत्री, पुलिस व्यवस्था का अपमान नहीं कर सकते। मुम्बई और महाराष्ट्र का शासन भी उनके हाथ में नहीं है। क्या वे अन्य प्रदेशों में बसे मराठियों को वापस बुलाना चाहेंगे? उनको यदि मार पड़ी, तो क्या वे बचाने पहुचेंगे। क्यों मराठा लोगों को अपने देश में फैलने से रोक लगा रहे हैं? क्या इस नारे से देश की अखण्डता को ठेस नहीं पहुंची? क्या मराठियों का सम्मान संकुचित नहीं हुआ? क्या युवा मराठा का दम इस माहौल में घुट नहीं जाएगा? क्या वे इन बड़बोलों को माफ कर देंगे? सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि भाषा का विवाद क्या देश की एकता और अखण्डता में आरक्षण जैसा नासूर नहीं है?

गुलाब कोठारी

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2 टिप्पणियाँ »

  1. Dear Sir,
    I am a an Ardent Admirer of your Blogs/Article in Rajasthan Patrika,specially those apearing recently on Aarakshan & Corruption.I am myself a Media Professional,working in Jaipur for last 15 years.I have some suggestions.

    1.Rajasthan Patrika has always been a front runner in being the people’s voice as far as current issues are concerned.Here,I would like to suggest that there are certain issues which would have been better addressed by your NewsPaper if you were PRO-ACTIVE rather being REACTIVE.For Example,the recent TORRENTIAL RAINS were a MISSED OPPERTUNITY for the GOVERNMENT OF RAJASTHAN & THE MEDIA ALIKE.I say so because the media did a Reporting Job after the Rainwater went into Drains,exposing the government,but if it had been campaigning vigorously and pressurising the Govt before the monsoon,the Government would have been forced to take Action beforehand,and the Rainwater would have been saved from wastage.

    2.On the burning Issue of Corruption,I have writtern to the CM also many a times.My suggestions are as under..

    > Regarding INDIA’S FIGHT AGAINST CORRUPTION,We need to fight it out at the
    > grassroot level,with contributions from one & all.Every man on the street
    > should
    > & can contribute in his own little way.
    >
    > Corruption is rampant in our society today,and effects our lives almost
    > daily.Its far reaching consiquences are fatal to the Nation.
    > I feel its time we gave a serious thought to this boiling issue.I feel the
    > best
    > way to combat this menace called CORRUPTION is to
    > ENCOURAGE,PROMOTE & REWARD the HONEST.This PROBIOTIC EFFECT will increase
    > the
    > HONEST genes and automatically destroy CORRUPTION,and take it to its logical
    > end.It works on the same principle where,in order to decrease the size of a
    > line,another bigger live is drawn beside it. Tha government should Encourage
    > should the Honest,by way of handsome incentives& honouring them in
    > recognition
    > of their contributions.
    >
    > I also feel that ,in order to infuse& build up faith in the common man,we
    > can
    > take on corruption head-on,systematically.For example,we all are aware that
    > there is a huge price difference between the whole sale price & the retail
    > price,due to which common man suffers almost daily.This is basically due to
    > the
    > middleman,who is responsible.If we work on this system and set it
    > right,the success will not only bring down the alarming price hike,but give
    > a
    > sense of direction to this fight against Corruption
    >>

    I would appreciate your feedback on my suggestions.
    >

    Regards

    Sandeep Srivastav

    cell-8947093999

    टिप्पणी द्वारा Sandeep Srivastav — सितम्बर 10, 2012 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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