Gulabkothari's Blog

दिसम्बर 24, 2012

गुलाब कोठारी को मूर्तिदेवी पुरस्कार

नई दिल्ली। लेखक,चिंतक एवं पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी को सोमवार को उनकी कृति “मैं ही राधा मैं ही कृष्ण” के लिए भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से वर्ष 2011 का 25वां मूर्तिदेवी पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने दिया। गुलाब कोठारी को पुरस्कार स्वरूप चार लाख रूपए का चेक प्रदान किया गया। उन्हें श्रीफल देकर और शॉल ओढ़ाकर राजस्थान निर्मित मूर्ति प्रदान कर सम्मानित किया गया।1

इस मौके पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी भी मंचासीन थे। तीन मूर्ति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में मीरा कुमार ने कहा कि एक अच्छा लेखक वही होता है,जिसके अंदर संवेदनाएं होती हैं। मेरा अपना अनुभव है कि बिना संवेदनशील हुए लेखक नहीं बना जा सकता।

इस लिहाज से गुलाब कोठारी बेहद संवेदनशील हैं। इसका अंदाजा मुझे तब हुआ,जब मैं सामाजिक न्याय मंत्री थी और निशक्तजनों की सहायता के लिए अलग-अलग राज्यों में शिविर लगाए जा रहे थे। इसी सिलसिले में एक बार जयपुर में शिविर का आयोजन हुआ,जिसमें बच्चे,अभिभावक और इस क्षेत्र में काम कर रहे कई संगठन के प्रतिनिधि थे। वहां केवल एक ही व्यक्ति थे,जो किसी संगठन से जुडे हुए नहीं थे,तब मुझे मुलाकात के दौरान बताया गया कि ये तो राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक हैं,मैं उनसे बहुत प्रभावित हुई।

gulab-kothari-honoured-with-Moortidevi-Award

मुझे लगा कि जो व्यक्ति इस छोटे शिविर में आ सकता है,वह कितना संवेदनशील है,इसलिए वे जब भी,जहां भी बुलाएंगे,मैं वहां चली आऊंगी।

इस मौके पर भारतीय ज्ञानपीठ के आजीवन न्यासी अलोक प्रकाश जैन ने कहा कि मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित गुलाब कोठारी एक प्रतिष्ठित और विचारशील रचनाकार हैं। वे एक पत्रकार हैं,कवि हैं,संवेदनशील विचारक और सुचिन्तित गद्यकार हैं। वे निरन्तर करूणा,बुद्धि और विवेक की चिन्तन परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं।

समारोह के अंत में ज्ञानपीठ के निदेशक रविंद्र कालिया ने सभी का धन्यवाद देते हुए कहा कि मूर्तिदेवी पुरस्कार ज्ञानपीठ की परंपरा का उज्वल प्रयास है। गुलाब कोठारी की कृति में स्त्री भावों को जिस तरह उकेरा गया है,वह अतुल्यनीय है।

Gulab kothari

 

ये भी रहे मौजूद
समारोह में राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता वसुंधरा राजे सिंधिया,सांसद गिरिजा व्यास,सांसद दुष्यंत सिंह,विधायक ओम बिड़ला,भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव किरण माहेश्वरी,पूर्व भाजपा महासचिव संजय जोशी,पंजाब केसरी के संपादक विजय चोपड़ा के अलावा साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी,चित्रा मुद्गल,कैलाश वाजपेयी,सत्यव्रत शास्त्री,ममता कालिया,पदमा सचदेव समेत साहित्या,कला,संस्कृति से जुड़ी तमाम हस्तियां उपस्थित थीं।

व्यक्ति स्वयं ही राधा-स्वयं ही कृष्ण : कोठारी
समारोह में गुलाब कोठारी ने कहा कि लेखन कर्म की शुरूआत पाठक को इष्ट मानकर की जाती है। उसी का आशीर्वाद आवरणों को समझने में दर्पण बनता है। चौरासी लाख योनियों के आवरणों को हटाने के लिए भी कम से कम चौरासी लाख कृष्ण अंशों का आशीर्वाद चाहिए। पाठक यदि इससे भी अधिक हों तो आवरण हटने की गति तेज हो जाती है। इसी से ज्ञान प्रकट होता है क्योंकि ज्ञान पैदा नहीं होता,बस ढका रहता है।

 

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कोठारी ने कहा कि कर्म के लिए कामना और कामना के लिए ज्ञान आवश्यक है। जैसे-जैसे ज्ञान से पर्दे हटते जाते हैं,पाठक रूपी इष्ट भीतर दिखाई देने लगता है। उसी के माध्यम से आवरण दिखाई देते हैं। पाठक का भीतर प्रविष्ट हो जाना ही शब्द-ब्रह्म की साधना का मूल लक्ष्य है। हम कह सकते हें कि लेखन कार्य शब्द-ब्रह्म या कृष्ण को पाने का यात्रा मार्ग हो सकता है।

फिर क्या जरूरत उसे बाहर कहीं ढूंढ़ने की और क्या जरूरत है,कोई अन्य वेद पढ़ने की। भीतर-बाहर सब कृष्ण ही कृष्ण। उनके मुताबिक कृष्ण बनकर कृष्ण को नहीं पाया जा सकता इसके लिए पुरूष का स्त्रैण बनना भक्ति मार्ग की अनिवार्यता है। अर्द्धनारीश्वर का स्वरूप तब जाकर समझ में आता है और तब पाठक शब्दों के अंतराल को पढ़ने लायक बनता जाता है। गीता साक्षी है कि शब्द -ब्रह्म का ऎश्वर्य ही भगवान हो जाता है। व्यक्ति स्वयं ही राधा,स्वयं ही कृष्ण हो जाता है।

उन्होंने कहा कि ब्रह्म के कारण ही सृष्टि पुरूष प्रधान है। शेष सारी माया है,आवरण है। इसी कारण लेखन कार्य शब्द-ब्रह्म की तपोभूमि है। शब्द वाक का जप है,अनुष्ठान है। श्रद्धा और समर्पण पाठक के प्रति कृष्ण अंश के प्रति इसकी अनिवार्यता है। तब भयास की निरंतरता इस जप को वाचिक से उपांशु और आगे मानस में प्रष्ठित कर देती है। मन के भाव ही अभिव्यक्ति के लिए होते हैं। वे ही प्राणों के रूप में गतिमान होकर शब्द-वाक बनते हैं।। जिस प्रकार अर्थ सृष्टि में क्षर पुरूष में अक्षर पुरूष और अक्षर पुरूष में अव्यय पुरूष रूप आलंबन प्रतिष्ठित रहता है,वैसे ही वाक सृष्टि में भी शब्द के भीतर अक्षर, स्वर और स्फोट रहते हैं। व्यक्ति अपने आवरणों को भी पाठक के निमित्त समझता जाता है। इनको समझना ही हटाने की प्रक्रिया है।

पुरस्कार एवं सम्मान

मूर्ति देवी पुरस्कार 2011- “मैं ही राधा मैं ही कृष्ण” कृति के लिए भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा घोषित पुरस्कार
हल्दीघाटी अवार्ड 2012- उल्लेखनीय पत्रकारिता के लिए महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन द्वारा
डॉ. राममनोहर लोहिया स्मृति राष्ट्रीय
पुरस्कार 2011- अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच नासिक (महाराष्ट्र)
तरूण क्रांति साहित्य सम्मान 2011
आईओयू पीस अवार्ड 2010
जाइन्ट्स इंटरनेशनल अवार्ड 2010- पत्रकारिता के क्षेत्र में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ विशेष अभियान के लिए जाइन्ट्स इन्टरनेशनल मुम्बई द्वारा
पंडित दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान 2009 – छोटी खाटू हिंदी पुस्तकालय राजस्थान
चतुर्थ ओकी-दो पुरस्कार 2007-08 -ओकीदो जिक्कोकई मिक्यो योगा, इटली
राष्ट्र गौरव अवार्ड 2007- तिरूपति आंध्रप्रदेश स्थित ब्रह्मचारी आश्रम के आचार्य गुरूजी गुरूवानंदजी द्वारा
नैतिक सम्मान-2006- गुलजारीलाल नंदा फाउण्डेशन, आम आदमी के जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए
भास्कर पुरस्कार 2003- प्रखर नेतृत्व के लिए भारत निर्माण संगठन द्वारा
आचार्य तुलसी सम्मान 2003- पत्रकारिता में मानवीय मूल्यों के समावेश के लिए
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार 1995-96
फोटो पत्रकारिता पुस्तक लेखन के लिए
मेट्रो ओकी-दो योगा सम्मान
ओकी-दो गूडो जिक्कोकई मिक्यो योगा इटली
सुदीर्घ साधना सम्मान, भोपाल

इन मानद पदों पर आसीन

जनमंगल चेरिटेबल ट्रस्ट- पत्रिका के लोक कल्याण कार्यक्रमों के लिए पत्रिका की ओर से संचालित संस्था। यह गरीबी व आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए है।
पंडित मधुसूदन ओझा वैदिक अध्ययन एवं शोधपीठ संस्थान- वैदिक साहित्य के अनुसंधान व प्रोत्साहन के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त
आईओयूएफ नीदरलैण्ड्स तथा ओकी-दो ग्लोबल रिसर्च इंस्टीट्यूट, इटली के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार
ओकी-दो मिक्यो योगा लिबेरा यूनवर्सिता, कोरबोरदोलो (इटली) के मानद अध्यक्ष
आईओयूएफ नीदरलैण्ड्स व अमरीका के प्रोफेसर वैदिक स्टडीज

प्रकाशित पुस्तकें

मानस- हिंदी संस्करण चार भाग- वैदिक मूल्यों पर आधारित यह पुस्तक संतुलित जीवन का रास्ता दिखाती है। यह पुस्तक मानव मस्तिष्क को आम आदमी व समाज को वास्तविक खुशियों का मार्ग दिखाती है। इस पुस्तक का दस भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
बाडी माइंड इन्टेलेक्ट (अंग्रेजी) -शोध पुस्तक, इस पर आईओयू ने डॉ. कोठारी को डी लिट की उपाधि दी।
सोल ऑफ इवोल्यूशन (अंग्रेजी)
संप्रेषण- सोल ऑफ इवोल्यूशन पुस्तक का हिन्दी संस्करण
न्यूजपेपर मैनेजमेंट इन इंडिया (अंग्रेजी) -शोध पुस्तक जिस पर आईओयू ने उन्हें पीएचडी की उपाधि दी।
सिमटता नारी तत्व- इसमें डॉ. कोठारी ने नारी के विभिन्न रूपों का सजीव चित्रण किया है।
कलर टेक्सटाइल्स ऑफ राजस्थान (हिन्दी-अंग्रेजी द्विभाषी) -इस पुस्तक में राजस्थान के वस्त्रों व हैण्डीक्राफ्ट की जानकारी मिलती है।
स्पंदन- चिन्तनपरक आलेखों का संकलन
स्पंद- कविताओं का संग्रह
धर्म, अर्थ,काम,(माया) मोक्ष -मानव जीवन के व्यथित भावों की चार गाथात्मक कविताएं
स्टेपिंग स्टोन्स टू स्प्रिचुअलिटी- (अंग्रेजी)
फोटो पत्रकारिता- फोटो पत्रकारिता के बारे में उपयोगी संदर्भ पुस्तक
पत्रकारिता जनसंचार एवं विज्ञापन- पत्रकारिता के छात्र- छात्राओं के लिए उपयोगी पुस्तक
समाचार पत्र प्रबंधन – (हिंदी)
लिखावट और आपका व्यक्तित्व- हस्तलेखन पर शोधपरक पुस्तक
आद्या- नन्ही पौत्री से प्रेरित गाथात्मक दार्शनिक कविताओं का संग्रह
कृष्ण तत्व की वैज्ञानिकता- पंडित मधुसूदन ओझा के शास्त्रीय दृष्टिकोण में गीता में कृष्ण तत्व का वैज्ञानिक आधार
वेद : वैज्ञानिक दृष्टि- वेद के वैज्ञानिक पहलुओं पर आधारित आलेखों का संकलन
राजस्थान की ग्रामीण कलाएं एवं कलाकार- राजस्थान के ग्रामीण जीवन की कलाएं व कलाकारों पर प्रामाणिक अध्ययन

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