Gulabkothari's Blog

मार्च 2, 2013

समय कम है

Filed under: Special Articles — gulabkothari @ 7:00
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दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के कार्यकाल में यह पहली बैठक है। यह तथ्य सबके सामने है कि गडकरी के स्थान पर राजनाथ सिंह को पुन: क्यों अध्यक्ष पद दिया गया। अब राजनाथ सिंह ही तय करेंगे कि वे भाजपा को प्रवाह पतित होने से रोकना चाहते हैं, या नेताओं की मर्जी पर समुद्र के पैंदे भेजना चाहते हैं। पिछले कार्यकाल की तरह चेहरों के अनुरूप राजनीति इस बार काम नहीं आएगी।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निर्णय पार्टी एवं जनता के हित में दिखाई देने चाहिए। वरना सर्वसम्मति के बावजूद जनता इसके निर्णयों को स्वीकार नहीं करने वाली। अब तो यह भी आवाज आने लगी है कि विभिन्न पदों पर मनोनयन का सिलसिला बंद होना चाहिए। चाहे राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य ही क्यों न हों। मनोनयन करके लोकतांत्रिक निर्णय कर पाना सहज नहीं है।

पिछले वर्षो में भाजपा का आपराधिक चेहरा भयानक रूप लेता गया। हर प्रदेश में भाजपा कठघरे में खड़ी है। यह कहना उचित नहीं है कि भाजपा कांग्रेस से कम खराब है। भाजपा के दोगले चेहरे भी उभरते जा रहे हैं। नेता गूंगे तो हैं, किंतु शर्मसार नहीं हैं। राजस्थान विधानसभा में मुख्यमंत्री ने यह कहकर चौंका दिया कि भाजपा के एक पूर्व मंत्री इनके साथ मिलना चाहते थे। मध्यप्रदेश के भोजशाला (धार) के घटनाक्रम ने भाजपा के वरिष्ठ मंत्री के दोगलेपन को सार्वजनिक कर दिया।

इन मंत्री महोदय को बचाने में मुख्यमंत्री की भी विशेष रूचि सामने आ गई, जो शिशुपाल की तरह इनके सौ अपराध माफ करने का शायद वचन दे चुके हैं। भू-माफिया, हथियार-माफिया, सेक्स माफिया, मादक-द्रव्य और शराब माफिया आदि सभी क्षेत्रों में भाजपा का परचम फहरा रहा है। बड़े-बड़े नेता संरक्षक बने बैैठे हैं। कर्नाटक के रेaी बंधु का मुद्दा अभी भी शांत नहीं हुआ है। उन्हीं से जुड़ी भाजपा की एक शीर्ष सांसद की आसान जीत के लिए कांग्रेस प्रत्याशी का मैदान में न रहना भी मीडिया में खूब चर्चित रह चुका है।

मैं यह सब इसलिए गिना रहा हूं ताकि आप अपनी जानकारी पक्की कर लें। चुनाव सिर पर हैं, मतदाता की नजर बदली-बदली है। गुजरात और हिमाचल के चुनाव कुछ कह रहे हैं। अच्छा होगा यदि इन चुनावों का संदेश बैठक के प्रत्येक सदस्य के कान में गूंजे। आधे से अधिक मतदाता युवा होगा। बूढ़े, भ्रष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति के प्रत्याशियों का लिहाज नहीं करेगा। कार्यकारिणी तय कर ले कि इनको टिकट नहीं दिया जाएगा। हां, सामने वाली पार्टी को जिताना हो तो स्वागत है! पढ़े-लिखे, समझदार, समाज में मान्यता प्राप्त युवा लाएंगे, यह संकल्प भी करें। वंशवाद इस बार काम नहीं आएगा, मान लेना।

भाजपा को अपना घोषणा-पत्र याद रखना होगा। सत्ता और संगठन का भेद समाप्त होता जा रहा है। यहां तक कि पर्दे के पीछे अन्य विरोधी दलों से मिलकर चलने के अनेक उदाहरण सामने आ चुके हैं। विपक्ष को खरीदकर चुप कर देना भी अधिनायकवाद की ही अभिव्यक्ति है। आज तो बस एक ही मार्ग है- हर सदस्य संकल्प करे कि बीज की तरह जिएगा। जमीन में गड़ जाएगा। फल-फूल-छाया देश को मिलेगी। इसके अलावा तो बस आत्महत्या ही है। अर्थात भाजपा में भी लोगों को कांग्रेस ही दिखेगी।

गुलाब कोठारी

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