Gulabkothari's Blog

मई 9, 2013

ले डूबा लिहाज

कर्नाटक की जनता को बधाई! स्पष्ट बहुमत देकर स्थायी सरकार के लिए मतदान करने पर। लोगों का जोश भी देखने लायक ही था। लोकतंत्र के प्रति गंभीरता, सम्मान एवं जागरूकता (8 प्रतिशत अघिक मतदान) का जो परिचय दिया, वह देश के लिए अगले चुनावों में अनुकरणीय रहेगा!

 

कर्नाटक में जो परिणाम आए, उन्हें कांग्रेस की जीत कहेंगे अथवा भाजपा की हार। किसने इस महाभारत को जन्म दिया और भाजपा को वनवास दिलाया। येडि्डयूरप्पा, अनंत कुमार या फिर सुषमा स्वराज। वही सुषमा जो आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं।

 

देश जानता है कि कैसे उन्होंने यह पदवी हथियाई। कैसे चुनाव में कांग्रेसी उम्मीदवार को बाहर करवा दिया, कैसे रेड्डी बंधुओं को जेल भेजा और स्वयं बाहर रही!!! कैसे लोकसभा में विरोध के मुखौटे लहराए और स्वयं को बचाने के लिए भाजपा की विपक्ष की भूमिका को दांव पर लगा दिया।

सरकार से मौन करार कर लिया। भाजपा शीर्ष आज दो फाड़ है, तो राजघाट का नृत्य कहीं तो गूंज रहा होगा। भाजपा की इस चुनावी हार के पीछे एक ही लक्ष्य दिखाई पड़ता है-सुषमा को बचाना-भाजपा को बेचकर! येçaयूरप्पा की पार्टी ने एक तिहाई वोट काटकर भाजपा को तीसरे स्थान के पास पहुंचा दिया। क्या यही भाजपा का भविष्य बनकर रह जाएगा?

और सचमुच भाजपा हारी नहीं, बिक गई। टूट गई-एक नेता की चतुराई लील गई, इतने बड़े आधार वाली पार्टी को। भाजपा की यह एक बड़ी विशेषता है कि वह समय के साथ बदलने को तैयार नहीं। लिहाज करने में हर नुकसान उठाने को तैयार।

 

गुण्डा-भ्रष्ट-अपराधी कोई भी हो, पुराना साथी होने के नाते सौ गुनाह माफ। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ इसके ज्वलन्त उदाहरण हैं। मायावती-मुलायम केन्द्र सरकार से खुलकर लड़ रहे हैं। आरोपी भी हैं। भाजपा भी वैसी ही अपराधी है, किन्तु छवि ढंके रखने के चक्कर में, शीर्ष नेताओं के कृत्यों को दबाने के चक्कर में, झूठ पर झूठ बोलती रहती है। अगले चुनावों में भी इसी तरह हारेगी, क्योंकि गुण्डों/अपराघियों के टिकट काट नहीं पाएगी। युवा मतदाता उनको वोट नहीं देने वाला।

येडि्डयूरप्पा सरकार का घटनाक्रम देख लें। भाजपा शीर्ष के समय-समय पर लिए निर्णयों का आकलन कर लें। यदि उस समय सुषमा को नहीं बचाते तो आज कर्नाटक में पार्टी की बलि नहीं होती। न भाजपा सरकार गिरती, न आगे का दु:खद क्रम ही चलता। जिस व्यक्ति को भाजपा ने गद्दी पर बैठाया, भाजपा उसे ही जेल भेजकर गौरवान्वित हुई। सरकार हाथ से निकल गई।

एक व्यक्ति को बचाकर क्या हासिल हुआ? अपयश! पूरा देश इस पूरे काण्ड को जानता है। दो फाड़ भाजपा में वैसे भी सुषमा का जातिवाद नई पीढ़ी को आकर्षित नहीं कर पाएगा। उन्हें विकास चाहिए। पुरानी सदी के लोग भाजपा की सीटों को अन्य पार्टियों की झोली में डालेंगे, यह कर्नाटक ने स्पष्ट कर दिया।

 

पिछली मुलाकात में नितिन गड़करी को भी यही बात कही थी कि भाजपा या तो बदल जाए, या विलीन हो जाए। प्रकृति नित्य परिवर्तनशील है। वही कभी सुषमा दिखाई पड़ती है, कभी ऊष्मा बनकर दाहक हो जाती है। अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि उसकी सरकार जन अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है। नई पीढ़ी विकास का आकलन करेगी। वह चेहरों का लिहाज नहीं करेगी। नेता को यह नहीं मान लेना चाहिए कि कांग्रेस की सरकार उसकी लोकप्रियता का परिणाम है। यह तो उसे अब हासिल करनी है।

 

गुलाब कोठारी

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