Gulabkothari's Blog

जनवरी 3, 2014

झाड़ू से सावधान

कहते हैं कि बंधी बुहारी लाख की, बिखर गई तो खाक की। “आप” पार्टी ने दिल्ली में बहुमत साबित करके अपनी “लाख” की छवि तो सिद्ध कर दी। अब कुरूक्षेत्र का युद्ध सामने है। भाजपा ने अनेक दलीलों से यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि सत्ता हथियाने के लिए केजरीवाल ने जनता से किए वादे तोड़े। जब केजरीवाल स्वच्छ हैं, तो हम क्यों नहीं हैं। “राजनीति में सब जायज है” ऎसा ही कुछ दिखाई भी दिया। कांग्रेस समर्पण के मूड में थी। उसके सामने कोई विकल्प भी नहीं था। मजबूरी ही कह सकते हैं। फिर भी कांग्रेस का यह कहना कि जब तक “आप” पार्टी दिल्ली के मुद्दों तथा भ्रष्टाचार के विरूद्ध कार्य करती रहेगी, हम साथ रहेंगे वरना, समर्थन लौटा लेंगे। इस भाषा में कूटनीति तो है। साथ ही यह कहना कि छह माह सरकार (दिल्ली) को अफसरों के हाथों छोड़ने से तो आप के हाथों सौंपना ठीक होगा। वे तो हमारे 15 साल के अच्छे कार्यो को भी बिगाड़ देंगे। आप कम से कम कृत संकल्प तो है। ऎसा ही प्रहार अफसरों पर केजरीवाल ने किया। उन्होंने तो अफसरों को सजा देना अनिवार्य बताया। यह एक बड़ा संकेत है कि अफसरशाही ने जिस प्रकार का सुरक्षा का घेरा अपने चारों ओर बना रखा है, भ्रष्टाचार की जड़ वही है। अफसर सबसे डरपोक जीव होता है। भ्रष्ट भी हो तो कायर भी होगा। भ्रष्टाचार को समेटना है तो इस सुरक्षा के घेरे को तोड़ना पहली आवश्यकता है। फिर यह किसी का भी भ्रष्टाचार में साथ नहीं देंगे। न्यायाधीशों का भी नहीं।

यह सही है कि केजरीवाल ने झूठ का सहारा लिया है। हर बुद्धिजीवी ऎसा करता है। इसका भी खमियाजा तो भोगना ही पड़ेगा। आज नहीं तो कल। लेकिन, देखना यही है कि सरकार कितनी चलती है। इसका प्रभाव “आप” पार्टी के निर्णयों पर पड़ेगा। यह भी सही है कि काफी निर्णय तो पार्टी ले ही चुकी है। कदम फूंक-फूंककर उठाना पड़ेगा। पार्टी के निर्णयों से कई के पेट पर लात पड़ेगी। कई दलों को भी अपना चाल-चलन-चेहरा बदलना पड़ेगा। बहुमत सिद्ध होने के साथ-साथ एक ओर घोष्ाणाओं की बौछारें होगी और उनके साथ-साथ देशभर में पार्टी संगठन की तैयारियां करने लगेगी। धन की कमी मिट जाएगी। अभी तो पार्टी इधर घोषणा करती है, उधर लागू कर देती है। इसका प्रभाव केन्द्र पर भी होगा। अन्य प्रदेशों पर भी होगा।

दिल्ली में भले ही कांग्रेस के पास खोने को आज कुछ नहीं होगा, संसद (लोकसभा) चुनावों में तो होगा। केजरीवाल आदर्शवाद की हवा बनाएंगे, कांग्रेस, भाजपा एवं अन्य दलों को स्पर्द्धा में उतरना पड़ेगा। वरना जनता भाजपा को भी निपटा देगी। आज इस डर से भाजपा के कलेजे में भी धक-धक शुरू हो गई है। अब फिर करोड़ों रूपए खर्च करके सर्वे करा रही है कि क्या मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बचेगी भी या नहीं। यूथ इनकी ओर मुड़ने को तैयार ही नहीं। उनका तो कहना है कि सरकार मुफ्त में कुछ नहीं दे, सबको देने की बात हो, सही देने की बात हो।

सबसे बड़ी बात है सत्ता के अहंकार का प्रभाव। भाजपा का अहंकार सदन में स्पष्ट सुनाई दे रहा था। जैसे अपनी हार को छिपाने का प्रयास किया जा रहा हो। दोनों दलों को फाइलें खुलने की तैयारी में रहना चाहिए। पहले अन्य दलों की, बाद में कांग्रेस की। बदलाव तो पूरे देश में जबर्दस्त आएगा। “आप” पार्टी की दृढ़ता और निरंतरता पर निर्भर करेगा। समय कम है। करके दिखाना होगा। लोकपाल विधेयक के पास होते ही प्रान्तीय सरकारों पर रातों-रात दबाव पड़ेगा कि वहां भी इसी तरह के प्रभावी कानून को लागू किया जाए। यही सबसे बड़ा झाड़ू सिद्ध होने वाला है। जब दिल्ली ने ही कर दिया, प्रदेश कहां ठहर पाएंगे। इसके साथ ही अफसरों, न्यायाधीशों आदि के सजा के रास्ते खुल जाएंगे। भ्रष्टाचार को घुटने टेकने ही पड़ेंगे। ऊर्जा प्रधान बिजली कम्पनियो का ऑडिट दर्जनों अधिकारियों को जेल में बिठा देगा। आयात करने वालों के, कोल ब्लॉक वालों के तो चेहरे स्याह हो सकते हैं।

ठेकेदारी प्रथा समाप्त होती चली गई, तो कई अफसरों और नेताओं की नींद उड़ जाएगी। इससे भी वजनदार निर्णय है- निजी क्षेत्रों में सीधे विदेशी निवेश (भागीदारी) से मुक्ति। कांग्रेस ने देश को लूटा है, तो एफडीआई के जरिए। विदेशियों के हाथों देश को बेचने का मार्ग खोलती जा रही थी।

विश्वास मत के साथ देश में विश्वास की एक नई लहर दौड़ पड़ी है। जो इसका विरोध करेगा। उसे मुंह की खानी पड़ेगी। आज युवा हर अहंकार को तोड़ डालने के मूड में है। यही माहौल बना रहा, यूं ही निर्णय लागू होते गए तो बिना “आप” की मदद के कोई भी दल केन्द्र में सरकार नहीं बना पाएगा। एक नया लोकतंत्र आएगा।

 

-गुलाब कोठारी

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1 टिप्पणी »

  1. आपने पूर्ण सहजता एवं स्पष्टता से AAP का सकारात्मक प्रभाव दर्शाया है |
    किन्तु 24 दिसम्बर को आपने एक लेख ‘चल दरिया में’ में कहा था कि, “एक माह में फाइलें नहीं खुली तो आप पार्टी का सत्ता मोह स्पष्ट हो जाएगा। तब शायद दोबारा चुनाव लड़ने की हैसियत भी नहीं बचे। क्यों आत्महत्या पर तुले हो, केजरीवाल। हो जाने दो दुबारा चुनाव। बहुमत से सरकार बनाना।
    -गुलाब कोठारी”

    जहाँ तक एक माह का सवाल है वो पूर्ण हो चूका है, क्या अब आपके कथन का आपकी ही दृष्टि में कोई मूल्य नहीं रह गया?

    टिप्पणी द्वारा Himanshu Yadav — जनवरी 25, 2014 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


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