Gulabkothari's Blog

फ़रवरी 25, 2015

एक म्यान, दो तलवार

राजस्थान में आपका स्वागत है। संघ भाजपा का जनक है और आप पितामह की भूमिका निभा रहे हैं। आपका एक पैर राजनीति में है तथा दूसरा बाहर। संघ राजनीतिक नियुक्तियों में भागीदारी चाहता है और दर्शक की भूमिका में भी बना रहना चाहता है। राष्ट्र मानता है कि नरेन्द्र मोदी संघ की ही देन हैं। शायद यही कारण है कि पिछले लोक सभा चुनाव में तथा बाद के चुनावों में हिन्दुत्व का मुद्दा प्रमुख रूप से उभर कर आया। आपको याद होगा कि जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव की तारीख पास आती जा रही थी हिन्दुत्व के नाम पर ध्रुवीकरण एक स्वरूप लेता जा रहा था। उसी दौरान अन्य संस्थाओं ने, कुछ संतों ने भी इस नारे को हवा दी। भाजपा अच्छे बहुमत से चुनाव जीत गई।

इसी बीच और इसी कारण देश में अल्पसंख्यकों का भी ध्रुवीकरण हो गया। चुनाव पूर्व तो ऎसा नहीं था। बल्कि एक वातावरण बनने लगा था कि कांग्रेस से विमुख होकर ये समूह भाजपा की ओर रूख करेगा। ध्रुवीकरण की हवा ने सब कुछ बदल दिया। राष्ट्र को नहीं मालूम की इस परिवर्तन का संघ की नीतियों पर क्या प्रभाव पड़ा, किंतु हिन्दुत्व का नारा जनप्रतिनिधियों में अधिक मुखरित हो गया। कुछ तो बेलगाम वक्तव्य भी जारी होने लगे थे। बड़ी संख्या में संन्यासियों का राजनीति में प्रवेश इसी का परिणाम था। सन्यास-धर्म की यह नई परम्परा प्रतिष्ठित हो गई। देश मौन रहा। कांग्रेस लाचार हो गई। उसने ही अल्पसंख्यकों का तथा आरक्षण का कार्ड फेंका था। इस संघर्ष में कांग्रेस भी डूबी और देश के भी टुकड़े हो गए।

जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों ने केन्द्र सरकार को यथार्थ का आभास करा दिया था, किंतु सत्ता का अहंकार इसे स्वीकार करना नहीं चाहता था। परिस्थिति को बदलने के लिए प्रधानमंत्री ने दौरों का बड़ा माहौल बना डाला, जो देश के लिए एक आश्चर्य से कम नहीं था। फि र भी कश्मीर घाटी ने भाजपा को नहीं स्वीकारा। एक भी सीट नहीं मिली। लेह भी हाथ नहीं लगा। यह भी ध्रुवीकरण का ही एक चेहरा था। संघ की प्रतिक्रिया राष्ट्र के समक्ष स्पष्ट नहीं आई। हां, दिल्ली विधानसभा चुनावों में संघ की नाराजगी स्पष्ट हुई। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अन्तिम क्षणों में हिन्दुत्व का कार्ड भी उल्टा पड़ गया।

मुस्लिम मतदाताओं ने तो भाजपा से मुंह फेर ही लिया था कि दिल्ली में गिरजाघर पर हुए हमले तथा उस पर सरकार के रूख ने युवा वर्ग के मन में एक तीखी प्रतिक्रिया भी पैदा कर दी। “आप” पार्टी को अपेक्षा से अधिक समर्थन मिल गया। अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा के वक्तव्य ने तो मानो देश पर कहर ही ढा दिया था। थोड़े विराम के बाद प्रधानमंत्री को घोषणा करनी पड़ी कि देश में किसी भी प्रकार की धार्मिक असहिष्णुता को बर्दाश्त नहीं किया जाएग। हाल ही में प्रवीण तोगडिया ने कहा कि मोदी कुछ भी क हते रहें, हमारा अभियान जारी रहेगा। हालांकि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-भाजपा गठबंधन को लेकर कुछ नहीं बोला। न ही बांग्लादेशियों की घर वापसी की ओर कुछ इंगित ही किया। प्रश्न यह है कि क्या मोदी अपने वादे के अनुसार तोगडिया के विरूद्ध कार्रवाई करेंगे? उससे भी एक कदम आगे संघ प्रमुख का यह बयान कि मदर टेरेसा (संत) का सेवा कार्य वस्तुत: धर्मान्तरण ही था, मोदी को कार्रवाई करने की चुनौती दे रहा है।

कांग्रेस ने मुसलमानों का हिन्दुओं के खिलाफ ध्रुवीकरण करवाया। देश के भीतर दो देश बना दिए। शेष 80 प्रतिशत के भी आधे-आधे दो धड़े आरक्षण ने कर दिए। 40 प्रतिशत में ब्राहमण, क्षत्रिय, वैश्य एक जाजम पर बैठने वाले नहीं हैं।

भले ही कश्मीर में गठबंधन कर लिया होगा। हर समाज ही अल्पमत समाज हो गया। हर वर्ग द्वेष और वैमनस्य के वातावरण में जीने लगा है। इस पूरे राजनीति चक्र में भी आशा की कोई किरण है तो बस संघ प्रमुख हैं, जिनके साथ विश्व का बड़ा संगठन है। वे संकल्प कर लें तो देश में नया वातावरण बन सकता है। उनको यह तो मालूम ही है कि हिन्दू किसी धर्म का नाम नहीं है। किसी को हिन्दू बनाने का एक ही अर्थ है कि उसे जीने की स्वतंत्रता दिलवाना। स्थिति को देखने के लिए दृष्टि बदलनी पड़ेगी। “ईट का जवाब पत्थर” कभी सफल नहीं हुआ। देखना यह भी है कि एक म्यान में दो तलवारें कब तक रह पाएंगी।

2 टिप्पणियाँ »

  1. sir, you are right ,but what should we citizen do.we lived thousands of years in slavery and now we are helpless ,scapegoats of ruling neta ji .

    टिप्पणी द्वारा ram niwas agarwal — जुलाई 12, 2015 @ 7:00 | प्रतिक्रिया


RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

WordPress.com पर ब्लॉग.

%d bloggers like this: