Gulabkothari's Blog

मई 28, 2016

संकल्प करें

जीवन एक संकल्प है, उद्देश्य है। बिना संकल्प जीवन और मृत्यु का भेद समाप्त हो जाता है तथा मनुष्य और पशु के मध्य की रेखा भी लुप्त हो जाती है। क्या बेईमानी से करोड़ों कमाने वाला जानता है कि वह कितना कमाना चाहता है और क्यों? यह अज्ञानता ही मृत्यु है। इस दृष्टि से पत्रिका एक समाचार-पत्र भी है, संकल्प भी है और समाज का रहनुमा भी है। आज हर पाठक को भरोसा है कि हमारे बीच ‘पत्रिका’ है जो सच्चाई को न छुपाता है और न ही छिपने देता है। यही तो संकल्प है, यही पत्रिका की पहचान है।

पाठक का हित ही पत्रिका की विषय वस्तु है। शायद यही कारण है कि पत्रिका का नाम पेड न्यूज में भी नहीं आया और ना ही पनामा पेपर्स लीक में ही कहीं पढऩे-सुनने को मिला। पाठक के लिए यही गर्व की बात भी है। युवा पीढ़ी के लिए यही मंगल संस्कार हैं। आज न्याय तो आम आदमी के लिए दुर्लभ ही हो गया। जगह-जगह की ठोकरें जब व्यक्ति को थका देती हैं, तब उसे पहले पत्रिका याद आता है, फिर भगवान। वह पत्रिका पहुंचता है, बेझिझक अपनी बात करता है। उसके मन में विश्वास तो है ही कि पत्रिका में उसकी बात दबेगी नहीं, पत्रिका न केवल मुद्दे को उठाएगा बल्कि उसके लिए पाठक के साथ संघर्ष भी करेगा।

पत्रिका की पहल पर आवासीय कॉलोनियों में शराबबंदी अभियान चलाया गया। इसी तरह व्यापमं, खनन माफिया, ड्रग ट्रायल, जमीन का दर्द, सूदखोरी जैसे जन विरोधी अपराधों के खिलाफ पत्रिका ने अभियान चलाए। तब कहीं नियम-कायदों में सुधार भी हुआ तो कई बदले भी गए।

आज यह बात भी कहावत बन गई है कि अगला विश्व युद्ध पानी को लेकर होगा। वहीं पत्रिका ने जन साधारण को प्रेरित करके ‘अमृतम् जलम्’ अभियान शुरू किया था। स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सहित सवा-डेढ़ लाख लोगों ने भोपाल के बड़े तालाब की खुदाई करके जल संग्रहण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। पत्रिका का हौसला, यश बुलन्दी पर पहुंच गया। अभियान ने प्रदेश भर में अपने परिणाम साल-दर साल देने शुरू कर दिए। उसके बाद तो वृक्षारोपण, बाल शिक्षा कार्यक्रम, नींव, बेटी बचाओ जैसे सामाजिक जागरुकता के कई कार्यक्रम हाथ में लिए। चुनावों में तो ‘मतदाता को जागरूक’ करने, लोकतंत्र की गहराइयों को छूने, जनप्रतिनिधियों के कार्यों का कच्चा चिट्ठा खोलने तथा उनसे मतदाता को ‘रूबरू’ कराने का अनूठा कार्य भी पत्रिका ने वर्षों से हाथ में ले रखा है। इसके लिए भारतीय चुनाव आयोग की ओर से शुरू किया गया प्रथम ‘राष्ट्रीय मीडिया अवॉर्ड’ भी पत्रिका की झोली में आया।

पत्रिका का एक संकल्प यह भी है कि इसमें छपी सामग्री के कारण किसी पाठक का धन व्यर्थ न हो जाए। गलत सूचनाएं पाठकों तक न पहुंच जाएं। पाठकों की मूल्यपरक जीवनशैली में, भारतीय पृष्ठभूमि के केन्द्रीभूत एवं शाश्वत संस्कारों में भी अभिवृद्धि बनी रहे। यही कारण है कि पत्रिका में छपी वर्षभर की श्रेष्ठ कविता तथा कहानी को 21-21 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाता है। पत्रिका में श्रेष्ठ साहित्य का प्रकाशन इसी कारण है।

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में आकर हमने एक-एक ईंट जोड़कर, प्रदेश की खुशहाली का चित्र तैयार किया है। इसकी लकीरें भावनात्मक भाषा में उकेरी गई हैं। इन्हीं लकीरों में पाठकों की धड़कनें हैं, उनके जीवन के जीवन्त स्पन्दन हैं। आज का यह की-नोट कार्यक्रम भी मध्यप्रदेश में इसी शृंखला की एक कड़ी है। इससे पहले की-नोट शृंखला के तीन आयोजन जयपुर में हो चुके हैं। इन सभी का मकसद विभिन्न मुद्दों और समस्याओं के तात्कालिक और दीर्घकालिक समाधान समाज एवं राष्ट्र के सम्मुख रखना है। अब यही आग्रह यहां आए हुए विशेषज्ञों से है। आप सभी वक्ताओं को इन स्वप्नचित्रों में रंग भरने हैं। वे हमारे विकास के नियामक तत्त्व होंगे। मध्यप्रदेश का विकास तथा मानव जीवन को सार्थक करने का यही श्रेष्ठ मार्ग होगा। ईश्वर सदा हमारे साथ होंगे। बस, संकल्प शुद्ध हो।

नमस्कार!

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