Gulabkothari's Blog

जनवरी 19, 2018

नाकारा सरकार

राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति नारकीय स्तर तक पहुंच चुकी है। हत्याएं, बलात्कार, चिकित्सा में जीवन के स्थान पर मौत का उपहार, अतिक्रमणों को मौन स्वीकृति, भर्तियों में घोटाले, खान आवंटन में भ्रष्टाचार आदि के अलावा प्रदेश में हो क्या रहा है? आश्चर्य तो यह भी है कि गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया आंकड़ों के नशे में धुत्त हैं। उन्हें कुछ गलत होता दिखाई ही नहीं देता। उनके चिन्तन और कार्यशैली की गिरावट को शब्दों में नहीं कहें तो ज्यादा उचित होगा। हालांकि इस सरकार में तो कितने मंत्रियों के कामकाज इस्तीफा देने की सीमा को भी पार कर चुके हैं। चाहे स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ हों, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीचन्द कृपलानी हों या फिर परिवहन मंत्री युनुस खान। प्रश्न यह है कि इस्तीफा मांगे कौन? इसी को रामराज्य कहते हैं।

आज हमारा सिर शर्म से झुक गया है। हमारी संवैधानिक एजेंसियां अपने यहां की जन समस्याओं, विशेषकर कानून व्यवस्था, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार आदि से कारगर ढंग से निपट नहीं पाई। यह भी कह सकते हैं कि नाकारा साबित हो गईं। पुलिस, न्यायपालिका, लोकायुक्त, राज्य मानव अधिकार आयोग जैसे भारी-भरकम स्तम्भ जाने-अनजाने कारणों से चरमराते जान पड़ रहे हैं। इन रोजमर्रा की दुर्घटनाओं के निस्तारण के लिए जन सुनवाई करने अध्यक्ष एच एल दत्तू सहित पूरे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का जयपुर आना ही विषय की गंभीरता को दर्शाता है।

कहीं तो आग है कि धुआं दिल्ली तक पहुंचा है। प्रश्न बड़ा है कि राज्य का कोई भी संस्थान अपने कार्य में सफल क्यों नहीं होता? क्यों सभी जगह लीपापोती और पत्राचार के आगे सब मौन। क्या पेट अब देश से बड़ा होने लग गया है? अथवा कोई भीतर का डर हमें खा रहा है! जो भी कारण हों, मार्ग हमें निकालना होगा। प्रदेशवासियों को भी इस संघर्ष में आगे आना ही पड़ेगा। बहुत सो लिए, बहुत स्वार्थ भी साध लिए। कुछ तो आजादी बनाए रखने के लिए भी नियमित तपना पड़ेगा। युवावर्ग क्यों मौन है?

आज राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जन सुनवाई के दौरान आपात स्थिति की तर्ज पर पुलिस महानिदेशक को बुलवाया और कानून व्यवस्था की नारकीय स्थिति पर गंभीर टिप्पणियां कीं। यह भी कहा कि, राज्य की स्थिति ठीक नहीं है। तब क्या महानिदेशक का सिर गर्व से ऊंचा हुआ होगा? जिसके आदेशों की पालना में उनका सारा लवाजमा लगा रहता है, उनके बारे में थी यह टिप्पणी। इतना ही नहीं, आयोग ने चेतावनी भी दे डाली कि भविष्य में आयोग यहां नहीं आएगा, बल्कि दिल्ली बुलाएगा। किस मतदाता को शर्म नहीं आएगी अपनी चुनी हुई सरकार पर?

यह भी आश्चर्य है कि सरकार और सभी सरकारी एजेंसियां मौन धारण किए बैठी हैं। सब अपनी-अपनी कुर्सी की अकड़ भी बनाए हुए हैं। जन समस्याएं बहुत छोटी लगती हैं, अपने पेट के आगे। चाहे बच्चे मरें, किसान मरें, मरीज मरें, बेरोजगार मृत्यु की स्वीकृति मांगें। क्या यही हमारे सपनों का लोकतंत्र है? जनता को सोचना तो पड़ेगा कि क्या यही विरासत नई पीढ़ी को सौंपकर जाएंगे? क्या सरकार ही संकल्प कर लेगी कि अगली बार मानवाधिकार आयोग कुछ अच्छा ही देखेगा?

Advertisements

टिप्पणी करे »

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं ।

RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

वर्डप्रेस (WordPress.com) पर एक स्वतंत्र वेबसाइट या ब्लॉग बनाएँ .

%d bloggers like this: