Gulabkothari's Blog

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54 टिप्पणियाँ »

  1. आदरणीय कोठारी जी पत्रिका में किसी पत्रकार आनंद स्वरुप शर्मा द्वारा चारण व भाट जाती के लिए अपमानजनक टिपण्णी के विरोध में देविपुत्र चारणों में गहरा रोष है। में समझ नही पा रहा हु की ये “पत्रकार(?)” महोदय माफ़ी नही मांग रहे है या पत्रिका उन्हें ऐसा करने से रोक रही है ?.

    टिप्पणी द्वारा Dinesh — जुलाई 21, 2016 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  2. Sir i am dakshika studying class 9 in saint sodier public school .i have written 2 poems on my favourite class 8 -b so how to post it in your newspaper Rajasthan Patrika

    टिप्पणी द्वारा dakshika prajapati — अगस्त 5, 2015 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  3. आदरणीय कोठारी जी मैं आपकी लेखन शैली का प्रशंसक हूँ तथा सरजी मेरा भी कविता लिखने का शौक है और मैने लिख भी रखी है लेकिन मुझे इन्हे प्रकाशित कराने का कोई मार्गदर्शन नहीं मिला। आप ही मार्गदर्शन करें..

    टिप्पणी द्वारा Shyam sms Indlia — जनवरी 2, 2014 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • आप कविता परिशिष्ट सम्पादकजी को भेज सकते हैं। पता है:
      पत्रिकायन
      ई-5, झालाना संस्थानिक क्षेत्र
      जयपुर
      Email- anand.joshi@epatrika.com

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — जनवरी 29, 2014 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  4. Hello Gulab ji sir
    first I salute because you are really a genetal man or great man and you always lift metter of public issue or you gave message always good to peoples and nations throu patrika I like patrika god bless you sir I want in political all peoples like you
    ram ram ji sir gopal jaipur

    टिप्पणी द्वारा gopal — अगस्त 31, 2012 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  5. sir i m a youngest student of maharaja’s college jaipur of 18 yrs old. I write some romantic poem that based on love i want to publish them in ur newspaper so plz sir tell me what i do for it.

    टिप्पणी द्वारा jaswant singh — अगस्त 30, 2012 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  6. gulab kothari ji jis tarike se aapne indore me bhu-mafiyao(kailash-Maindola) ke khilaf awaz uthai he me bahut kush hu.aap paiso ke aur bahubal ke aage nahi jhuke lekin print media ne aapka saath nahi diya lekin indore ke lakho logo ki dua aapke sath he aap sanghrsha karo.par ab toh DB(bikau) bhi munna ke baare me chaap raha he.dekhna dire dhire sab aapke sath ho jayenge.kyoki satya pareshaan ho sakta he par parajit nahi.

    टिप्पणी द्वारा sharad dewara — जून 25, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  7. महापुरुष किसी की बपोती नहीं होते…..
    आदरणीय कोठारी जी., जय माई की.
    कल देश ने श्यामा प्रसाद मुकर्जी जी का बलिदान दिवस मनाया
    मुझे लगता है की महापुरुषों पर सभी का अधिकार होता है .
    महापुरुष किसी की बपोती नहीं होते…..
    अगर कोई ऐसा सोचता है की महापुरुष केवल पार्टी विशेष के होतें हैं
    तो यह उसकी मुर्खता होगी.
    उनकी जन्म तिथि अथवा पुण्यतिथि मनाने का अधिकार सभी को होता है और
    होना भी चाहिए .
    आज जरूरत इस बात की है की भले ही हम उनकी जयंती या पुण्यतिथि ना
    मनाएं पर उनके आदर्शों को तो अपनाएँ यदि मुकर्जी जी के विचारों को आज के नेता अपना
    लें तो देश का कल्याण हो जायगा लेकिन हो उल्टा रहा है
    महापुरुषों को साल मैं केवल दो बार याद किया जाता है
    नेता लोग अपना फोटो छपवा कर हीरो बनने की कोशिश करते हैं दुःख की बात यह है की लगभग सारे दलों
    के नेता व उनके चमचे यही कर रहे हैं व महापुरुषों की आत्मा को दुखी कर रहे हैं इन महापुरुषों के कार्यक्रमों मैं
    भी अपने गुट के लोगों को व चमचो को ही बुलाया जाता है आखिर हम देश को कहाँ ले जाना चाहते
    हैं कोई दिशा ही समझ नहीं आती आपको कुछ समझ आता हो तो मुझे जरूर बताएं
    धन्यवाद
    जय माई की.
    शैलेन्द्र सक्सेना “सर”
    डायरेक्टर- असेंट इंग्लिश स्पीकिंग कोचिंग
    चार खम्बा गली बरेठ रोड गंज बासोदा
    जिला -विदिशा म.प्र .
    ०९८२७२४९९६४
    07594-221568 9907820131.

    टिप्पणी द्वारा Shailendra Saxena"Sir" — जून 24, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  8. आदरणीय कोठारी जी.
    जय माई की.
    बड़े नेता कार्यकर्ताओं को कहते हैं की पद की इच्छा न करें
    समर्पण की भावना से काम करें
    जब खुद का वक्त आता हैं तो पद पाने के लिए व टिकिट पाने के लिए
    गिरमा तक तोड़ देते हैं सारे नियम ताक मैं रख दिए जाते हैं
    अपनी -अपनी पसंद के समर्थकों को व अपने चमचों को पद बांटे जाते हैं
    योग्य लोगों को कोई नहीं पूछता उन्हें नियम बाताये जाते हैं
    विधायक व मंत्री अपने कोटे के लोगों को व पैसे वालों को पद बाँट देते हैं
    अर्थात पर उपदेश कुशल बहुतेरे
    कमोबेश यह स्थिति सभी दलों की है
    लगता है दुष्यंत जी ने कितना सही कहा था
    “तू ना समझेगा सियासत तू अभी इन्सान है ”
    आपका क्या ख्याल है उम्मीद है इस पर आप कोई अच्छा सा
    सम्पादकीय जरूर लिखेंगे
    आदर सहित
    जय माई की.
    शैलेन्द्र सक्सेना “सर”
    संचालक -असेंट इंग्लिश स्पीकिंग कोचिंग
    चार खम्बा वाली गली
    बरेठ रोड
    गंज बासोदा म.प.
    ०९८२७२४९९६४

    टिप्पणी द्वारा Shailendra Saxena"Sir" — जून 20, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  9. respected sir,
    I really enjoy & feel enthusiastic whenever i read SPANDAN,because it contains lots of spiritual & religious matter,which gives the description about our culture.But today i think we itself destroying our ethics,cultural & moral values by adopting western culture.In yourarticle everytime you talk about moral values(SANSKAR),but you never mention how to give values to students & kids,how to implement these values on children ,because of increasing science & technology people specially our young generation just think & consider these values as a joke,today all talks about money or either about their girlfriends, but nobody talks on spiritual content because today we have forgotten god & the religious disciples(ADARSH).all parents want their children to become engineer,doctor,etc…but there will be very less parents who want their child to be a narayana from nar by doing nishkam karm which is more better than noble deeds.
    aajkal sab kuch open environment ho gaya hai…like homosexuality even animals does not prefer it,even i also think that live in relationships are illegal because if both boy & girl live together befor marriage then definitely chances of pre marital sex will occur,which is illegal by considering vedic scriptures,it means either that god is mad to make rules of marriage or we are more intelligent than god to declare LIVE IN as legal,if both are in love then they should first marry & then they can live together.IN such type of environment do you really think that it is easy to lay the moral values on young generation.I HAVE LOT TO SAY,but right now i am concluding….sir you are really doing great job to improve our young generation.

    टिप्पणी द्वारा NIKHIL — जून 16, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  10. Kothari ji, Jai mai ki,
    Bhopal guess kand ka jo phesla aaya hai vah kisi ke gale nahin utar raha hai….
    lagta hai unta ke munha main zeera….
    (A drop in the ocean)
    is nirnay ne lakhon ke dilon ko toda hai…
    and kai log sandeha ke ghere main hain….
    Shailendra Saxena”Sir’
    Ganj Basoda. M.P.
    09827249964

    टिप्पणी द्वारा Shailendra Saxena"Sir" — जून 9, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  11. Sir,
    thanks very much for bringing out such a good articles as spandan in a series. It’s not only heart touching but also powerful enough to make us again think about our true values.
    I wish to study more about these things so woxld u like to suggest me where i should refer to for further reading.

    टिप्पणी द्वारा Goutam riyar — जून 6, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  12. respected sir,
    namaste. i m from jodhpur and love to write poems on social happenings like child labour,
    female abortions, women exploitation, relationship of a mother and daughter etc…but i never
    get chance to share my thoughts with common people.. so i want to publish my some poems in my
    family news paper that is rajasthan patrika.

    टिप्पणी द्वारा mrs priyanka purohit — मई 27, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  13. कारवां मेरा किसी के रोके रूक नहीं सकता ,
    तूफान हूँ मैं आये बिना थम नहीं सकता
    बुलंदियों की जिसको चाह नहीं होती
    उसके जीवन मैं कोई सोगात नहीं होती
    बूँद ,बूँद होकर भी अपना ऐहसास नहीं खोती
    ज़माने के लिए मैं कुछ भी नहीं,बस बूँद ही सही
    पर बूँद बिना समुन्दर की ओकात नहीं होती ……….
    आज के लिए सिर्फ इतना ही
    Please do reply
    Regards
    Your loving Brother
    Shailendra Saxena
    Ganj Basoda.M.P.
    09827249964

    टिप्पणी द्वारा Shailendra Saxena"Sir" — मई 23, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • बिन आंख से मोती के टपके नूरे इलाही की बरसात नहीं होती।

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — जून 3, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  14. respected sir,
    i want to publish my slogan for patrika heading for this hot era ………………
    SLOGAN
    “PURI HIMMAT KE SATH BOLENGE ,
    JO SACH HO VO BAAT BOLENGE….
    SAHIBO HUM KALAM KE BETE HE…….,
    HUM KESE DIN KO RAAT BOLENGE.”

    टिप्पणी द्वारा abhishek dubey — मई 8, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • धन्यवाद!
      देखते हैं कहां उपयोग कर पाते हैं। बहुत अच्छा है।

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — मई 19, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  15. Sir namaskar.

    sir aapko likhne ki prerna kaha se milti hai. aap likha hua bahot guur hota hai.
    sir mai chahti huin ki aap aisa koi garibo ke liye trust khulwaye jahan par koi bhi kabhi bhi aa kar jo bhi vo dena chahte hai de sake.mai patrika duara isliye chati huin ki vo sahi haton mai pahunche.

    टिप्पणी द्वारा Manisha Shrivastav — अप्रैल 12, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • जनमंगल चैरिटेबल ट्रस्ट
      केसरगढ़, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, जयपुर

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — मई 19, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  16. i would like to thanks mr. g.s. kothari for writing “spandan” & trying to come back the new generation in own culture at that time where every one ready to adop western culture.

    i like ur every blog which is full of spiritual.
    thanks again.
    and wish u for attain success in ur mission

    टिप्पणी द्वारा ajit lamoria — मार्च 14, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  17. sir i want to publish my poems in rajasthan patrika…
    i want 2 send some of them to u.
    i need ur e-mail id.
    kindly reply

    टिप्पणी द्वारा neha — मार्च 7, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  18. aap ke lekho ki aaj ke samay me bahut jarurat hai.pl thodi bhasha saral likhe.

    टिप्पणी द्वारा padam jain — फ़रवरी 22, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • Thank you

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — मार्च 15, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • यह तो होना ही था………

      अंततः श्री प्रभात झा भाजपा के नए अध्यक्ष बन ही गए
      मैंने कई पत्रों मैं अपने लेखों मैं पहले ही स्पष्ट कर दिया
      था और यह तो होना ही था
      कई दावेदार थे पर प्रभात जी जैसा योग्य व पारखी
      शायद ही कोई और होता
      मैं और मीडिया जगत के कई मित्रों के लिए यह
      समाचार निसंदेह उपलब्धि वाला है क्योंकि वर्षों
      वाद फिर एक कलमकार को सम्मान मिला है
      वर्षों पहले कांग्रेस के राजीव शुक्ल भी पत्रकारिता
      जगत से आये थे और भी कई पत्रकार मित्र व कलमकार
      राजनीती मैं हैं और सफल भी हैं
      अटल जी भी इसके उदाहरण हैं
      पद हैं तो चुनोतियाँ भी हैं जिनसे निपटना झा साहब
      अच्छी तरह जानते हैं
      प्रभात जी के रूप मैं भाजपा को एक चिन्तक मिल गया है
      जिसकी सोच बहुत दूर की है पिछले ३३ सालों से सेवारत
      प्रभात झा इश्वर मैं अनन्य विस्वास रखते हैं व खुद को एक साधारण
      कार्यकर्ता ही मानते हैं
      मेरी उनसे जब भी बात होती है मुझे एकदम तरोताजा कर जाती है
      उनकी यही सहजता उन्हें सफल करेगी
      उनकी कलम मैं सकारात्मक सोच है आँखों मैं चमक है कुछ नया खोजने की
      उनके संकल्पों मैं भाजपा बसती है उनका चिंतन मानवता को समर्पित है
      भाजपा मैं सबको साथ लेकर चलने का उनका भाव मायूस व अलग थलग
      पड़े कार्यकर्ताओं मैं जोश भरने के लिए काफी है
      उम्मीद बहुत है उनसे योग्य व इंटेलिजेंट कार्यकर्ताओं को वे जरूर काम से लगा
      देंगे .
      सहज ही हम कह सकते हैं की बीजेपी मैं नव प्रभात हुआ है जिसका असर
      दूरगामी व लाभकारी होगा
      शैलेन्द्र सक्सेना “सर”
      गंज बासोदा
      09827249964
      आदर सहित प्रकाशनार्थ

      टिप्पणी द्वारा Shailendra Saxena"Sir" — मई 15, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

      • इंदौर के घटनाक्रम को देखकर मौन हैं। यही दर्शन उनका भविष्य भी है।

        टिप्पणी द्वारा gulabkothari — जून 3, 2010 @ 7:00

  19. at your surat edition
    most of person are live of gogund and dist udaipur are live at surat in business but not any news come in your surat paper mostly news come only gujrat and bihar maharashtra but not
    news come of rajashtan udaipur district village
    gogunda sayara mo no.09427834667

    टिप्पणी द्वारा sohan lal — जनवरी 29, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  20. sir I am a engineering student and i am a regular reder of spandana.Acctualy we are tree students.We are thankful to you to show us the new way for our research.Today we read a line from your article “dharma aur shiksha” . The line is”mujhe ek bhi chatra nahi mila,jo mere sath vedon par karya kar sake” but we want to say that we want to gain the knowledge of our vedas and to spread their knowledge to this new generation that is runing towards the western culture.acctualy we are researching on black holes and we have been read all the physics and foud not any result for the creation and ending of the universe thats why we have to go towards our vedas and we find them a treasure of knoledge.i want to read vedas not for any purpouse but only to know the reality of this awesome univers created by the supreme powerand we know that our vedas have all the informations.Sir we dont even know hindi properly and no one taught us hindi in this way but we are trying to read it from zero and to making “indian science” from it.I want some help to do this but we have not found any one .The people just runing towards an unknown goal even the teachers . We dont know how we do it but we know that we can do it.

    टिप्पणी द्वारा deeksha — जनवरी 24, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  21. apk lekh very good.

    टिप्पणी द्वारा mahender vijay — नवम्बर 27, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • Thanks

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — जनवरी 20, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

      • Dear sir,I have seen Rajesthan Patrika in city Bengluru.It is remakable attempt to launch a hindi newpaper in a non hindi speeking area.I wish a great success of your newspaper in south India.You are fulfilling emotional and itellectual need of north Indians those are residing in Bengaluru. thanks.
        prabhat roy

        टिप्पणी द्वारा Prabhat Roy — जून 3, 2010 @ 7:00

      • Thanks !

        टिप्पणी द्वारा gulabkothari — जुलाई 7, 2010 @ 7:00

  22. Respected sir,
    I have been thinking to write you regarding your column SPANDAN since last Many days. I appreciate your writing in spiritual and religious field, I don’t know How many people read that particular column but whoever read that one, once Will think for a while to do anything after going through your spiritual column. Sir You are doing very great job in these days when only people are with aggressive Temperament.
    I read your every column, which gives me tremendous positive energy. I discuss with my father that only few people are there to whom I wish to meet they are… Shri Rahul Gandhi, aacharya mahapragya, Shri Gulab kothari (I mean you) and Shri Narendra modi.
    Sir you are spreading tremendous pure energy Which can keep young people out of bad company or may say habit. Because Newspaper people everyday read.
    I have many things to say, but sir finishing Right now. Please keep yourself continue because they are useful for us and
    Motivate us towards right path.

    Thanking you surendra soni

    टिप्पणी द्वारा surendra soni — अक्टूबर 15, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • अपने मित्रों को भी पढ़ाते रहें। अच्छा वातावरण बन जाएगा।

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — जनवरी 11, 2010 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  23. Respected Kothariji,
    I am a regular reader of Spandan and many of these collectible articles are with me , some I remember as quotes and some I try to follow and practice in life .
    My comment is about “Schodasi II ” article today in Patrika.
    If I read this article it seems that under the flow of Knowledge of this unknown word of “atma” and “Brahma” the language is so tough or Clistha that I could not understand paragraph number 1,2,6 and some more. It was impossible to grasp the sentence and proceed for next line —- failing which the whole article seems to be very difficult.
    I am a Professor of Medicine in Medical College and on such difficult times I consider myself representing more than 90% readers who will find it difficult to understand this article,
    Many of us will find it more useful if you can write simple hindi meaning below or at the same place to enjoy full masterpiece of knowledge and religion.
    Dr V P Pandey- Indore-9826032164

    टिप्पणी द्वारा Dr V P Pandey — अक्टूबर 4, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

  24. sir
    iam feeling glad to tell u that i really found immense pleasure in reading ur blog, and kind of stuff u have added. i saw kulish ji award ceremony and really i have one good USP for the newspaper, and that is the marketting persons can bring this into reality by accomplishing the task.here is the description….
    sir people often use this paper as a cover of the books or their cover and childrens also use the same many times , you previously bring the almighty god posters on diwali and many times booklets on various other things, which bring good feedback and good name to papers also. i wnana tell u that as people use paper as a cover and saraswati godesss on it and feel glad than why can;t newspaper bring its cover pager once in a year like a book cover and having saraswati picture on it and name, class , subject like performa so that this idea can be nurtured into a total social cause and really kulish ji award will become total success.

    your,s sincerely
    neelesh nalwaya

    टिप्पणी द्वारा NILESH NALWAYA — अगस्त 2, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

    • It should be done by schools or parents

      टिप्पणी द्वारा gulabkothari — अगस्त 4, 2009 @ 7:00 | प्रतिक्रिया

      • respected kothari g kindly unfurl on this independence day your esteemed opinion and views on the philosophy of ‘manah as adhinayak to attain the much cherished object “bhagya vidhata “. if it appears as main article it will be very useful in current plitical and social scenario.hope it will not disturb you. thanks for lending me this opportunity. kailash pareek E-37 AYODHYA NAGAR HEERAPURA JAIPUR 302024.

        टिप्पणी द्वारा kailash pareek — अगस्त 12, 2012 @ 7:00

      • Thanks for opinion.

        टिप्पणी द्वारा gulabkothari — अगस्त 30, 2012 @ 7:00


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